Skanda Shasti 2026: हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कन्द षष्ठी का व्रत रखा जाता है. यह पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना और दान-पुण्य करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, स्कन्द षष्ठी के दिन पूजा के साथ-साथ अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करने का विशेष महत्व है.
स्कन्द षष्ठी पर करें इन चीजों का दान
- फलों का दान: इस दिन जरूरतमंद लोगों को मौसमी फलों का दान करना बेहद शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं और स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
- अनाज या अन्न दान: हिंदू धर्म में अन्न दान को बेहद महत्व दिया गया है. कहा जाता है कि भूखे या गरीब व्यक्ति को अनाज दान करने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद सदैव घर पर बना रहता है. इससे घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती.
- वस्त्र और पुस्तकें दान करें: कहते हैं कि इस दिन गरीबों को साफ वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके अलावा, यदि आप गरीब बच्चों को पुस्तकें या पढ़ने-लिखने की सामग्री दान करते हैं, तो इससे समाज में शिक्षा का प्रसार होता है और भगवान कार्तिकेय अत्यंत प्रसन्न होते हैं.
भगवान कार्तिकेय के मंत्र
शत्रु नाशक मंत्र
ऊँ शारवणभवाय नमः.
ज्ञानशक्तिधर स्कंद वल्लीकल्याण सुन्दर.
देवसेना मनःकान्त कार्तिकेय नमोऽस्तुते॥
ऊँ सुब्रह्मण्याय नमः.
सफलता हेतु मंत्र
आरमुखा ओम मुरूगा
वेल वेल मुरूगा मुरूगा
वा वा मुरूगा मुरूगा
वादी वेल अज़्गा मुरूगा
अदियार एलाया मुरूगा
अज़्गा मुरूगा वरूवाई
वादी वेलुधने वरूवाई
कार्तिकेय गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा सेनाय धीमहि तन्नः स्कन्दः प्रचोदयात्॥
कार्तिकेय स्तोत्र
योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः।
स्कन्दः कुमारः सेनानी स्वामी शंकरसंभवः॥
गांगेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः।
तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः॥
शब्दब्रह्मसमुद्रश्च सिद्धः सारस्वतो गुहः.
सनत्कुमारो भगवान् भोगमोक्षफलप्रदः॥
शरजन्मा गणाधीशः पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत्।
सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः॥
अष्टाविंशतिनामानि मदीयानिति यः पठेत्।
प्रत्यूषं श्रद्धया युक्तो मूकः वाचस्पतिर्भवेत्॥
महामंत्रमयानीति मम नामानुकीर्तनात्।
महाप्रज्ञामवाप्नोति नात्र कार्या विचारणा॥

