चेन्नई: तमिलनाडु चुनावों टीवीके के उदय और जोसेफ विजय के सत्ता संभालने के बाद बीजेपी नए सिरे से तैयारियों में जुटी गई है। पार्टी के अंदर फिर से के. अन्नामलाई को कमान देने की मांग उठ रही है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि अमेरिका की कैलिफोर्निया में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए ‘स्टैनफ़ोर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में कीनोट स्पीकर के तौर पर मौजूद रहे अन्नामलाई को पार्टी बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। सूत्रों की मानें तो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष इसकी तैयारियों में जुट गए हैं ताकि बिना किसी देरी के दक्षिण और खासकर तमिलनाडु में बीजेपी के मिशन को जारी रखा जा सके।
अन्नामलाई का तय है प्रमोशन
अन्नमलाई को फिर से कमान देने की मांग वाले कई पोस्टर सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। चर्चा है कि बीजेपी अन्नामलाई को नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में लेने के साथ राज्य सभा भी भेज सकती है। क्यों तमिलनाडु में बीजेपी चार विधायकों से 1 पर सिमट गई, हालांकि उसके वोट प्रतिशत में मामूली बढ़ोतरी हुई। 19-20 मई को कोयंबटूर में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष की अध्यक्षता में कोर कमेटी की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। पार्टी ने जब तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले नैनार नागेंद्रन को कमान सौंपी थी तब गठबंधन की बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी थी। इसलिए पदाधिकारियों को नहीं बदला गया था। ऐसे में पुरानी टीम बनी रही। अब तमिलनाडु बीजेपी में बदलाव की चर्चा जोरों पर है।
2021 में दर्ज कराई थी उपस्थिति
बीजेपी ने 2021 में एनडीए से 20 सीटों पर चुनाव लड़ा, चार सीटें जीतीं। तब बीजेपी ने 20 साल बाद तमिलनाडु विधानसभा में दोबारा एंट्री ली थी। तब राज्य भर में वोट शेयर 2.62% था। इस बार बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली उसके तमाम बड़े नेता चुनावों में हार गए। इनमें पूर्व राज्यपाल डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन, एल मुरुगन, वनाती श्रीनिवासन, एस विजयधारानी, नैनार नागेंद्रन शामिल हैं। बीजेपी को उधगमंडलम सीट पर जीत मिली। यहां से भोजराजन एम जीते। पार्टी का 2026 के विधानसभा चुनावों में कुल वोट प्रतिशत 2.97 फीसद रहा। ऐसे में अब बीजेपी के सामने एक बार फिर अन्नमलाई के नेतृत्व में लौटने का दबवा है।
सिर्फ अन्नामलाई ले सकते हैं टक्कर
यूपी और उत्तराखंड में पढ़ने के बाद कर्नाटक के आईपीएस की तौर पर नौकरी वाले के. अन्नामलाई का तमिलनाडु में फैन बेस हैं। वह पार्टी के वोट बैंक को बढ़ाकर दिखा चुके हैं। विधानसभा चुनावों के बाद जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन पर बयान दिया तो अन्नामलाई ने जवाब दिया। इतना ही नहीं स्टैनफोर्ड कांफ्रेंस में भी जब कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने कहा कि हिंदी थोपी गई तो साउथ नहीं मानेगा। उनके इस बयान पर के अन्नामलाई के बीच जबरदस्त विरोध किया। के. अन्नमलाई के लौटने का इंतजार हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है अन्नामलाई को बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती। इसकी तैयारी बीएल संतोष ने कर ली है।

