दुनिया के सबसे बड़े फिल्म मंचों में शामिल 79वें कांस फिल्म फेस्टिवल में इस बार फैशन और कला के बहाने एक सामाजिक बहस भी छिड़ गई है. राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री रुचि गुर्जर ने कांस के रेड कार्पेट पर पारंपरिक राजस्थानी घूंघट में कैटवॉक कर ऐसा संदेश दिया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर फिल्म और फैशन जगत तक हलचल मचा दी. रुचि ने घूंघट में कैटवॉक कर इसे महिलाओं की आजादी के खिलाफ बताते हुए परंपराओं और सामाजिकता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है.
रुचि का घूंघट लुक सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. कोई इसे राजस्थानी अभिनेत्री का साहसी और बोल्ड कदम बता रहा है, तो कोई इसे परंपराओं पर हमला करार दे रहा है. रुचि गुर्जर ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद कांस के मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाला नेकलेस पहनकर भी खूब सुर्खियां बटोरी थी.
रुचि का राजस्थानी परंपरा लहंगा लुक विरोध का प्रतीक
रुचि गुर्जर गुलाबी रंग के पारंपरिक राजस्थानी लहंगे और भारी गहनों के बीच चेहरे को ढकते पारदर्शी घूंघट में रेड कार्पेट पर उतरीं. पहली नजर में यह एक शाही राजस्थानी लुक लगा, लेकिन जैसे ही रुचि ने इसके पीछे का मकसद बताया, विवाद और बहस दोनों शुरू हो गए. रुचि ने साफ तौर पर कहा है कि उनका घूंघट ‘परंपरा का प्रदर्शन’ नहीं, बल्कि ‘विरोध का प्रतीक’ था. उन्होंने कहा कि ‘मैंने घूंघट इसलिए पहना ताकि दुनिया को दिखा सकूं कि आज भी कई महिलाएं सामाजिक दबाव और पुरानी सोच के कारण अपनी पहचान छिपाने को मजबूर हैं.’
घूंघट वाले वीडियो के साथ ही रुचि का यह बयान भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ लोग इसे महिलाओं की आजादी और बराबरी के लिए उठाई गई साहसी आवाज बता रहे हैं तो वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए विरोध भी जता रहे हैं और रुचि की आलोचना करते हुए उसे ट्रोल करने में लगे हुए हैं.
‘महिलाओं की पहचान छिपाने से नहीं बल्कि आजादी से होना चाहिए’
राजस्थान में घूंघट सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि लंबे समय से सामाजिक परंपरा का हिस्सा रहा है. ऐसे में राजस्थान की ही एक अभिनेत्री द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर घूंघट को ‘महिलाओं की आजादी के खिलाफ प्रतीक’ बताना कई लोगों को नागवार गुजर रहा है. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं कि अगर घूंघट इतना गलत है तो फिर उसी परंपरा को पहनकर दुनिया के सामने पेश क्यों किया गया?
हालांकि रुचि अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरा घूंघट चुप्पी नहीं, विरोध है. महिला का सम्मान उसकी पहचान छिपाने से नहीं, बल्कि उसकी बराबरी और आजादी से होना चाहिए.’ उन्होंने यह भी कहा कि संस्कृति महिलाओं को ताकत देनी चाहिए, उनकी आवाज नहीं दबानी चाहिए.
कई महिलाओं आज भी सामाजिक दबाव में जीने को मजबूर
रुचि का यह भी दावा है कि उन्होंने अपने आसपास ऐसी कई महिलाओं को देखा है जो आज भी सामाजिक दबाव में घूंघट के पीछे जीने को मजबूर हैं. यही वजह है कि उन्होंने कांस जैसे वैश्विक मंच को इस मुद्दे पर बातचीत शुरू करने के लिए चुना. उनका यह घूंघट लुक डिजाइनर रूपा शर्मा ने तैयार किया था, जिसमें पारंपरिक राजस्थानी कला और आधुनिक संदेश का मिश्रण देखने को मिला.
रुचि का यह अंदाज कहीं ज्यादा राजनीतिक, सामाजिक और विवादित माना जा रहा है. फिलहाल कांस के रेड कार्पेट पर उठा यह ‘घूंघट विवाद’ अब सिर्फ फैशन तक सीमित नहीं रहा. यह परंपरा, महिलाओं की आजादी और बदलते समाज के बीच चल रही उस बहस का हिस्सा बन चुका है, जो शायद अभी लंबे समय तक जारी रहने वाली है. वैसे कांस के मंच से पहले भी कई बार सामाजिक संदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन राजस्थानी अभिनेत्री के घूंघट के विरोध में किया गया कैटवॉक न सिर्फ विवादों के घेरे में है, बल्कि चर्चा का सबब भी बना हुआ है.

