पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी एक बार फिर आक्रामक तेवर में नजर आ रही हैं। हाल ही में हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास हुई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई और राज्य में ‘बुलडोजर संस्कृति’ की दस्तक ने तृणमूल कांग्रेस को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। रविवार को अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र और राज्य की नवगठित भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को ‘राज्य आतंकवाद’ का नाम देते हुए न्यायपालिका से हस्तक्षेप करने की अपील की है।

ममता ने प्रशासन पर लूटपाट और गरीबों के आशियाने उजाड़ने का आरोप लगाया

टीएमसी प्रमुख ने अपने पुराने कार्यकाल के विकास कार्यों की याद दिलाते हुए मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कल्याणी एक्सप्रेसवे ब्रिज के निर्माण का उदाहरण दिया। ममता ने कहा, ‘जब हमारी सरकार कल्याणी एक्सप्रेस सेतु बना रही थी, तब 43 घर इसकी जद में आ रहे थे। हमने उन्हें बेघर करने के बजाय, उनके लिए ठीक 43 नए घर बनाए और उनका पुनर्वास किया।’ इसके विपरीत, उन्होंने मौजूदा प्रशासन पर लूटपाट और गरीबों के आशियाने उजाड़ने का आरोप लगाया।

केंद्र सरकार को दी सीधी चेतावनी

अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने दिल्ली की सत्ता पर काबिज नेताओं को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सत्ता कभी स्थायी नहीं होती। ‘जब आप दिल्ली की गद्दी से नीचे गिरेंगे, तब आपको अपने इन क्रूर कर्मों का परिणाम भुगतना पड़ेगा। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं।’ यह बयान साफ दर्शाता है कि टीएमसी अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर भी भुनाने की तैयारी कर रही है।

संविधान और न्यायपालिका पर भरोसा

ममता ने प्रशासन की ओर से किए जा रहे बल प्रयोग को सीधे तौर पर चुनौती दी। उन्होंने कहा कि देश बंदूक की नोक से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है। न्यायपालिका को कानून का सच्चा रक्षक बताते हुए उन्होंने संकल्प लिया कि इस ‘राज्य आतंकवाद’ के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, ‘मैं यह देखना चाहती हूं कि आखिर ताकत किसमें ज्यादा है- भारत के संविधान में या फिर बंदूक की नली में।’

आखिर क्या है पूरा मामला ?

यह पूरा विवाद 16 मई को शुरू हुआ, जब हावड़ा रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाकों में नगर निगम और भारी पुलिस बल ने मिल कर एक बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस दौरान बुलडोजर और भारी मशीनों का इस्तेमाल कर उन तमाम ढांचों को जमींदोज कर दिया गया, जिन्हें प्रशासन ने अवैध बताया था।

‘बुलडोजर कार्रवाई’ और फेरीवालों को जबरन हटाने का विरोध

इस घटना के बाद से ही टीएमसी आक्रामक है। बुधवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाहर टीएमसी नेताओं ने इस ‘बुलडोजर कार्रवाई’ और फेरीवालों को जबरन हटाए जाने के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नवगठित भाजपा सरकार के इस रवैये के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और इसके विरोध में कोलकाता व आसपास के इलाकों में 21 मई को भी बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।

यह महज एक नियमित प्रशासनिक कार्रवाई: भाजपा

इस कार्रवाई पर टीएमसी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है और वे सड़कों पर उतर कर सरकार विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का तर्क है कि यह महज एक नियमित प्रशासनिक कार्रवाई है जिसका उद्देश्य रेलवे और सार्वजनिक संपत्ति को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है।

टीएमसी कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करेगी

टीएमसी ने 21 मई को पूरे कोलकाता और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर ‘बुलडोजर संस्कृति’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी इस मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की भी योजना बना रही है ताकि फेरीवालों के जबरन निष्कासन पर रोक लगाई जा सके।

बंगाल की ‘स्ट्रीट पॉलिटिक्स’ में नया अध्याय जुड़ा

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी ‘बुलडोजर’ एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन गया है। सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार की ओर से बुलडोजर का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए भी किया जा रहा है, जिसने बंगाल की ‘स्ट्रीट पॉलिटिक्स’ (सड़क की राजनीति) में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

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