Twisha Sharma Case Supreme Court hearing: ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की बेंच आज बेहद सख्त टिप्पणी की. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह ने मीडिया को इंटरव्यू देकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ऐसे सार्वजनिक बयान न्यायिक प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई और कहा कि अदालत उस नैरेटिव के खिलाफ है, जो मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने बेहद अहम टिप्पणियां कीं. इस मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि ‘माता-पिता के लिए डरी-सहमी बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी होती है.’ वहीं सीजेआई सूर्यकांत ने भी मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि अदालत किसी भी तरह के बनाए जा रहे ‘नैरेटिव’ के खिलाफ है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि सीबीआई आज ही ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत की जांच शुरू करे.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि ट्विशा शर्मा की मौत ‘दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वाभाविक’ परिस्थितियों में हुई है. अदालत ने साफ किया कि इस समय सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होनी चाहिए. इसी कारण कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की दिशा में सहमति जताई

‘सास गिरिबाला सिंह ने ट्विशा की छवि खराब करने की कोशिश की’

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि संबंधित जज (ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह) ने मीडिया को इंटरव्यू देकर मृतका के खिलाफ टिप्पणी की और उसकी छवि खराब करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ऐसे सार्वजनिक बयान न्यायिक प्रक्रिया और जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकते हैं.

तुषार मेहता ने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में मीडिया ट्रायल या सार्वजनिक बयानबाजी से बचना चाहिए. उनका कहना था कि बयान औपचारिक रूप से जांच एजेंसी के सामने दर्ज होने चाहिए, न कि टीवी इंटरव्यू या सार्वजनिक मंचों पर.

क्या बोले सीजेआई सूर्यकांत?

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई और कहा कि अदालत उस नैरेटिव के खिलाफ है, जो मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है. सीजेआई सूर्यकांत सूर्यकांत ने कहा कि इसी वजह से अदालत मानती है कि अब जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए.

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसे राज्य पुलिस और न्यायपालिका पर भरोसा है, लेकिन जनता का न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि ‘जो भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, उसमें यह सुनिश्चित होना चाहिए कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हो.’

सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित और आरोपी दोनों पक्षों के परिवारों से अपील की कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखें. कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक बयानबाजी से जांच प्रभावित हो सकती है और इससे पूर्वाग्रह पैदा होने का खतरा रहता है.

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील की. अदालत ने कहा कि संभावित गवाहों के बयान सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने से जांच पर अनावश्यक असर पड़ सकता है. कोर्ट ने आम लोगों से भी अटकलों से बचने और जांच एजेंसी पर भरोसा रखने की अपील की. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने अभी तक मामले में लगे किसी आरोप या किसी पक्ष की भूमिका पर कोई राय व्यक्त नहीं की है. अदालत ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच करना पूरी तरह जांच एजेंसी का काम है और वही तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालेगी.

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