देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank पर कॉर्पोरेट क्लाइंट को फायदा पहुंचाने के लिए हेरफेर करने के आरोप लग रहे हैं। बैंक पर आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार की एजेंसी महाराष्ट्र स्टेट रोड़ डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी MSRDC को ज्यादा ब्याज देने के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये ‘मार्केटिंग खर्च’ के रूप में दिखाए गए। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मामला करीब 45 करोड़ रुपये के भुगतान का है। बैंक की विजिलेंस जांच के मुताबिक, यह रकम सीधे ब्याज के तौर पर देने के बजाय रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन के नाम पर अलग-अलग वेंडर्स के जरिए जारी की गई। यानी कागजों में यह मार्केटिंग खर्च दिखा, लेकिन असल मकसद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज की भरपाई करना था।

ज्यादा ब्याज चाहता था MSRDC

सबसे अहम बात यह है कि जांच में बैंक के कई बड़े अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। इनमें बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन, CFO श्रीनिवासन वैद्यनाथन और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रवि संथानम के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि सीनियर लेवल की बैठकों में MSRDC को 6.01 फीसदी रिटर्न देने पर मौखिक सहमति बनी थी। जबकि उस समय बैंक सामान्य बचत खातों पर 3.5 फीसदी ही ब्याज दे रहा था।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

साल 2021 में एचडीएफसी बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को अपने पास लाने की कोशिश शुरू की। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर करीब 3.5 फीसदी ब्याज दे रहा था। लेकिन MSRDC ने कथित तौर पर कहा कि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6 फीसदी या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही हैं। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया कि अगर उसे 6.01 फीसदी रिटर्न मिला तो हजारों करोड़ रुपये के फंड बैंक में रखे जा सकते हैं। इसके बाद एचडीएफसी बैंक ने भी ऊंचे रिटर्न का भरोसा दे दिया, लेकिन सामान्य नियमों के तहत इतना ब्याज देना संभव नहीं था। यहीं से कथित तौर पर ‘मार्केटिंग खर्च’ वाला रास्ता निकाला गया।

ऑडिट में क्या मिला?

बैंक के मार्केटिंग विभाग के ऑडिट में कई गंभीर खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 और 2024-25 के दौरान करीब 39.7 करोड़ रुपये रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर खर्च दिखाए गए। लेकिन जांच टीम को यह तक नहीं मिला कि रकम तय कैसे हुई। एक ही फोटो को तीन अलग-अलग इनवॉइस के साथ लगाया गया था। कई भुगतान बिना जरूरी सर्टिफिकेट्स के जारी किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक की CSR टीम को इस अभियान में शामिल नहीं किया गया, जबकि ऐसे कैंपेन आमतौर पर CSR के जरिए चलते हैं।

मार्केटिंग विभाग ने खुद माना कि यह व्यवस्था बिजनेस टीम की तरफ से तय की गई थी और भुगतान प्रोसेस करने के लिए अतिरिक्त बजट दिया गया था। विजिलेंस जांच में मार्केटिंग प्रमुख रवि संथानम ने यह भी स्वीकार किया कि विभाग ने “डिफरेंशियल इंटरेस्ट” को मार्केटिंग खर्च की तरह दिखाने में ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका निभाई।

RBI नियमों के उल्लंघन का आरोप

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला RBI के उन नियमों के खिलाफ हो सकता है, जिनके अनुसार किसी एक ग्राहक को अलग से ज्यादा रिटर्न नहीं दिया जा सकता। रिपोर्ट में बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि भुगतान सीधे ब्याज के रूप में नहीं किया गया, बल्कि वेंडर्स के जरिए निकाला गया, इसलिए टैक्स और इनवॉइसिंग से जुड़े सवाल भी खड़े हो सकते हैं।

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