देश में रेल यात्रा के इतिहास में एक बड़ा कदम सामने आया है। रेलवे मंत्रालय ने देश की पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन के संचालन को मंजूरी दे दी। यह ट्रेन जिंद से सोनीपत के बीच चलेगी और पूरी तरह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होगा। इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (Distributed Power Rolling Stock) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पूरी ट्रेन में संतुलित पावर सप्लाई होती है। RDSO, CCRS और PESO जैसी संस्थाओं ने इसकी सुरक्षा जांच और मानक तय किए हैं। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि सभी शर्तें पूरी होने के बाद ही इसका संचालन शुरू होगा।

जिंद से सोनीपत के बीच चलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन

रेल मंत्रालय ने मंगलवार को उत्तर रेलवे जोन के तहत जिंद और सोनीपत के बीच देश की पहली 10 कोच वाली हाइड्रोजन DEMU ट्रेन के संचालन को मंजूरी दी। यह ट्रेन डीजल या पारंपरिक बिजली के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बिजली बनाकर चलेगी। इस ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह भारत के लिए एक नई तकनीक है, जो रेलवे को पर्यावरण के लिहाज से ज्यादा साफ और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

1200 किलोवॉट की क्षमता

इस ट्रेन की कुल पावर क्षमता 1200 किलोवॉट होगी। इसमें डिस्ट्रीब्यूटेड पावर रोलिंग स्टॉक (DPRS) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें पूरी ट्रेन में अलग-अलग कोचों में पावर सप्लाई होती है, किसी एक इंजन पर निर्भरता नहीं रहती। यह तकनीक न केवल ऊर्जा वितरण को बेहतर बनाती है, बल्कि ट्रेन के संचालन को भी अधिक स्थिर और संतुलित करती है।

सुरक्षा जांच और मंजूरी की लंबी प्रक्रिया

रेल मंत्रालय की मंजूरी से पहले रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) की तकनीकी स्वीकृति और कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CCRS) की सुरक्षा जांच पूरी की गई है। रेलवे बोर्ड ने नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway) के महाप्रबंधक को भेजे पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि RDSO, CCRS और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) द्वारा तय सभी सुरक्षा, रखरखाव और संचालन शर्तों का पालन किया जाए।

जिंद-सोनीपत रूट पर सीमित संचालन और मेंटेनेंस व्यवस्था

यह ट्रेन केवल जिंद से सोनीपत रूट पर ही चलाई जाएगी। इसके रखरखाव की सुविधा दिल्ली के शकूरबस्ती में तैयार की गई है। मेंटेनेंस के दौरान हाइड्रोजन सिस्टम बंद रहेगा और ट्रेन को डीजल लोकोमोटिव की मदद से डेड कंडीशन में खींचकर ले जाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि ट्रेन तुरंत चलने लगेगी। अभी कई तकनीकी और सुरक्षा जांच चरण बाकी हैं। सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही इसका संचालन शुरू होगा।

सुरक्षा पर खास चेतावनी और अहम निर्देश

हाइड्रोजन जैसी संवेदनशील तकनीक को देखते हुए मंत्रालय ने खास सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। पत्र में साफ कहा गया है। ‘जमीन पर स्थित हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और वितरण सुविधाओं पर लगे विभिन्न सेंसर (जैसे लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर आदि) धूल जमने के कारण खराब हो सकते हैं। सुरक्षित और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए, इनकी नियमित सफाई का आवश्यक कार्यक्रम तय किया जाना चाहिए।’ रेल मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि हाइड्रोजन ईंधन भरने और ट्रेन संचालन से जुड़े कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण और दक्षता प्रमाणन लेना अनिवार्य होगा। यह कदम सुरक्षा और तकनीकी दक्षता दोनों को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

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