कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पश्चिम बंगाल में आधार वेरिफिकेशन और वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट से कुछ असली लोगों के नाम गलती से हटा दिए गए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद नागरिकता खोने का कोई खतरा नहीं है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि यह सच है कि वोटर लिस्ट से कुछ असली लोगों के नाम हटा दिए गए थे। उनके पक्ष में कोई नतीजा नहीं आया और उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट की ताजा राय के अनुसार नागरिकता खोने का कोई डर नहीं है। कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं, जिसके बाद उनकी नागरिकता बनी रहेगी।
घुसपैठ के मुद्दे पर क्या बोले?
घुसपैठ के मुद्दे पर सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि यह मुख्य रूप से बांग्लादेश से हुई है और कुछ रोहिंग्या म्यांमार से आए हैं। इसमें धर्म की बात कहां से आ गई? घुसपैठ बांग्लादेश से हुई है, पाकिस्तान से नहीं। विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार पर सांसद ने कई कारण गिनाए। उन्होंने कहा, “आम लोगों की तरफ से बहुत बड़ा संदेश आया था। अगर हम जनता की दी गई चेतावनी पर ध्यान नहीं देते, तो नतीजा स्वाभाविक रूप से वही होता जो हुआ। वोटर लिस्ट को लेकर हमारी चिंताएं सही थीं, लेकिन हम आम लोगों को राहत नहीं दे पाए। हम कोर्ट भी गए, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली।
2 साल में कैसे मिली इतनी बड़ी हार
उन्होंने कहा कि पार्टी को इस बारे में सोचना चाहिए था और समझना चाहिए था कि 2024 के लोकसभा चुनावों में हमारी पार्टी ने 29 सीटें जीती थीं, तो फिर दो साल के अंदर ऐसा क्या हुआ कि आम लोग इतने नाराज हो गए कि उन्होंने हमें सत्ता से ही हटा दिया? अगर हमने उस चेतावनी को ध्यान में रखते हुए सही कदम उठाए होते, तो शायद आज हमें यह दिन देखना न पड़ता। सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने केंद्रीय बलों की तैनाती का जिक्र करते हुए कहा कि जब लोगों ने देखा कि 2.5 लाख केंद्रीय बल तैनात किए जा रहे हैं, तो उन्हें लगा कि उनका वोट देने का अधिकार वापस मिल जाएगा।
पार्टी में गंभीर खामियां स्वीकारी
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी में गंभीर खामियां स्वीकार कीं। उन्होंने कहा कि राजनीति में भ्रष्टाचार होता है, लेकिन जब हमने इसे संस्थागत रूप दे दिया, पंचायत स्तर से लेकर उच्चतम स्तर तक तो हर जगह भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार हो गया। हमारे पास कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं बचा था, क्योंकि हमने विपक्ष को पनपने का मौका ही नहीं दिया। सांसद ने माना कि राजनीतिक कार्यकर्ता पार्टी का कार्यक्रम आगे बढ़ाना चाहते थे, लेकिन भ्रष्टाचार और बिचौलियों ने माहौल खराब कर दिया। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश लौटने के लिए हजारों लोग जमा हो गए थे, जिससे स्थिति की गंभीरता साफ होती है।

