पेंशन, जीपीएफ, डीआर एरियर, पीपीओ और लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण का मिला भरोसा
पेंशनरों को डीआर देने में मध्यप्रदेश से सहमति लेने की बाध्यता की समाप्ति पर सरकार शीघ्र निर्णय लेगी
रायपुर – भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव के नेतृत्व में मंत्रालय, महानदी भवन, नया रायपुर में वित्त सचिव रोहित यादव से सौजन्य भेंट कर पेंशनरों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न लंबित एवं गंभीर मामलों पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक वित्त सचिव के आमंत्रण पर आयोजित हुई, जिसमें महासंघ द्वारा पूर्व में प्रस्तुत विभिन्न ज्ञापनों एवं मांगों पर बिंदुवार विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर रोहित यादव ने मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के तहत पेंशनरों को डीआर देने हेतु आपसी सहमति की बाध्यता को समाप्त करने पर सरकार विचार कर रही है और इस पर शीघ्र निर्णय लेगी।
बैठक में महासंघ ने पेंशनरों की वर्षों से लंबित समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारी आज भी अपने वैधानिक अधिकारों के लिए विभागों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। महासंघ ने वित्त सचिव के समक्ष विशेष रूप से 88 माह के लंबित डीआर एरियर भुगतान, पेंशन प्रकरणों के अनावश्यक विलंब, जीपीएफ भुगतान में गड़बड़ियां, सेवानिवृत्ति के दिन समस्त देयकों के भुगतान, कृषि विश्वविद्यालय के पेंशन प्रकरण, उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन तथा लंबित पीपीओ जारी करने जैसे विषय प्रमुखता से रखे।
महासंघ ने बताया कि राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त लगभग ₹2000 करोड़ की राशि को अंतरिम राहत के रूप में पेंशनरों को वितरित किए जाने की मांग भी बैठक में रखी गई। इसके साथ ही ₹10,536 करोड़ की शेष देनदारी एवं डीआर एरियर भुगतान में हो रहे अत्यधिक विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग भी की गई।
बैठक में जीपीएफ खातों में त्रुटियां, “नेगेटिव बैलेंस” दर्शाए जाने, रिकॉर्ड संधारण में लापरवाही तथा सेवानिवृत्ति के समय भुगतान में हो रही परेशानियों का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया गया। महासंघ ने मांग की कि जीपीएफ रिकॉर्ड का पूर्ण डिजिटलीकरण किया जाए तथा विभागीय त्रुटियों के कारण कर्मचारियों पर किसी प्रकार का आर्थिक भार न डाला जाए।
महासंघ ने यह भी मांग रखी कि सेवानिवृत्ति के दिन ही कर्मचारियों को पीपीओ सहित समस्त वैध देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए, जिससे उन्हें आर्थिक एवं मानसिक परेशानियों से मुक्ति मिल सके। इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का आग्रह किया गया।
बैठक में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों की पेंशन एवं महंगाई राहत से जुड़े लंबित मामलों को भी प्रमुखता से रखा गया। महासंघ ने आरोप लगाया कि शासन के आदेशों के अनुरूप समय पर डीआर का भुगतान नहीं किया जा रहा आश्चर्य जनक तथ्य यह है कि 46% के बाद 4% प्रतिशत डीआर का आदेश करना भूल गए बार बार स्मरण कराने के बाद भी एक दूसरे पर दोषारोपण करते हुए आदेश करने में टालमटोल कर रहे हैं तथा कई मामलों में पेंशन निर्धारण को भी लंबित रखे हुए है।
इसके अतिरिक्त महासंघ ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित आदेशों के पालन में हो रही देरी का विषय भी उठाया। महासंघ ने कहा कि नियमितीकरण पूर्व की सेवा अवधि को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ने के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद प्रकरण पर कार्यवाही लंबित है, दैनिक वेतन भोगी के उपादान भुगतान के अनेक मामलों में अनावश्यक आपत्तियां लगाई जा रही हैं, जिससे पेंशनरों को राहत नहीं मिल पा रही।
वित्त सचिव रोहित यादव ने महासंघ द्वारा प्रस्तुत सभी विषयों को गंभीरता से सुना तथा प्रत्येक मामले के परीक्षण एवं चरणबद्ध निराकरण का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि पेंशनरों की समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक पहल की जाएगी तथा जहां आवश्यक होगा वहां संबंधित विभागों को निर्देश भी जारी किए जाएंगे।
महासंघ ने बैठक को अत्यंत सकारात्मक एवं सार्थक बताते हुए आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार शीघ्र ही लंबित मामलों के समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लेगी।
बैठक में प्रतिनिधिमंडल के रूप में प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, प्रदेश महामंत्री अनिल गोल्हानी, प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी, विश्विद्यालय पेंशनर कल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक एन. के. चौबे, दैनिक वेतन भोगी पेंशनर कल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक अनिल पाठक सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।


