भोपाल: मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में जहां दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही हैं, वहीं भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पार्टी की दोनों संभावित सीटों के लिए करीब 15 नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश कर दी है, जिससे केंद्रीय नेतृत्व के सामने संतुलन साधने की चुनौती खड़ी हो गई है।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 1 जून से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 8 जून तक उम्मीदवार अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके साथ ही भोपाल से लेकर दिल्ली तक बैठकों और राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया गया है। प्रदेश नेतृत्व ने संगठन और सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं के नामों पर विचार करते हुए लगभग 15 संभावित दावेदारों की प्रोफाइल तैयार की है, जिन पर केंद्रीय नेतृत्व अंतिम फैसला करेगा।

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की है। पार्टी यह भी देख रही है कि राज्यसभा में किस चेहरे को भेजकर संगठन और सरकार दोनों को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। वहीं यह संभावना भी जताई जा रही है कि भाजपा किसी अन्य राज्य के वरिष्ठ नेता को मध्यप्रदेश से राज्यसभा भेजने का फैसला कर सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा की दो सीटों के लिए बढ़ी दावेदारी यह संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर कई नेता राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका तलाश रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवार चयन केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं बल्कि भाजपा के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेगा।

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