तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद एवं पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भीड़ ने ऐसा हमला किया कि लोकतंत्र पर सवाल उठने लगे। अभिषेक पर अंडे फेंके गए, पत्थर मारे गए, लात-थप्पड़ तक चले, उनकी कमीज फाड़ दी गई, उन्हें ‘चोर, चोर’ कहा गया, उनका चश्मा भी तोड़ दिया गया। सांसद को हेलमेट पहना कर, किसी तरह, वहां से निकाला गया। वह अब भी अस्पताल में भर्ती बताए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की, 15 लंबे सालों की सत्ता के बाद, करारी पराजय हुई है। मुख्यमंत्री रहीं एवं पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी तक हार गईं। अभिषेक ममता के ही सगे भतीजे हैं। बंगाल की जनता ने जनादेश के जरिए अपना गुस्सा, असंतोष, तृणमूल सरकार के प्रति नाराजगी और अस्वीकृति जता दी है। लोकतंत्र का बुनियादी अध्याय यहीं समाप्त होना चाहिए। अभिषेक पर भ्रष्टाचार, कटमनी, अवैध संपत्तियों, कोयला घोटाला, शिक्षा भर्ती घोटाला और धनशोधन के कई गंभीर आरोप हैं। जांच एजेंसियां और अदालत अपना काम कर रही हैं। अभिषेक दक्षिण 24, परगना के सोनारपुर इलाके में चुनावी हिंसा के शिकार पार्टी कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिलने तथा सहानुभूति जताने जा रहे थे। संभव है कि उस इलाके में सडक़ों, बिजली, पानी, नालियों का रखरखाव और उनकी व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी, लिहाजा लोगों का उत्तेजित होना, हारे हुए नेता के खिलाफ नारेबाजी करना, सीमित विरोध-प्रदर्शन करना स्वाभाविक है, लेकिन वह सब कुछ कानून-व्यवस्था के दायरे में किया जाना चाहिए। संयम और नियंत्रण की ‘लाल लकीर’ पार नहीं की जानी चाहिए, लेकिन भारत में सब कुछ उलट ही होता है। भीड़ कानून नहीं बना सकती। भीड़ सजा नहीं सुना सकती और न ही सजा दे सकती है। भीड़ का ऐसा व्यवहार पूरी तरह कानूनहीनता है। चुनाव तो देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी, कई मुख्यमंत्री और मंत्री हारे हैं। भीड़ शारीरिक हिंसा पर आमादा नहीं हो सकती। भारत में भीड़ अक्सर निरंकुश और हिंसक रही है। यह देश के कई हिस्सों में दंगों के दौरान देखा गया है। भीड़ पथराव करती है, लाठियां-तलवारें चमकाती है और पेट्रोल बम तक भी फेंकती है। क्या फिर भी हम ‘महान लोकतंत्र’ हैं? क्या इन आपराधिक हरकतों को ‘लोकतंत्र’ माना जा सकता है?

तीन बार के निर्वाचित सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ भीड़ ने जो किया है, वह निश्चित तौर पर अराजकता, सड़किया गुंडई, बेलगाम हिंसा, उन्माद, उच्छृंखलता के अलावा कुछ भी नहीं है। भीड़ का एक चेहरा देश के रक्षा-कृषि मंत्री रहे और अब भी राज्यसभा सांसद शरद पवार को थप्पड़ रसीद कर देता है, केंद्रीय वित्त-गृह मंत्री रहे और अब भी राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम पर जूता उछाला जाता है, दिल्ली के 10 साल मुख्यमंत्री रहे केजरीवाल के चेहरे पर कई बार कालिख पोती गई। बंगाल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर पथराव किया गया। पिछले चुनाव में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के तत्कालीन प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय पर भी हमले किए गए। आज एक और टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला किया गया। यह कैसा लोकतंत्र है? ये हरकतें क्या दर्शाती हैं? बंगाल में अब भाजपा की सरकार है और सुवेन्दु अधिकारी मुख्यमंत्री हैं। वह बहुत तेजी से व्यवस्था बदलने में जुटे हैं। कई सांप्रदायिक बदलाव भी किए गए हैं। बांग्लादेश सीमा पर 600 किमी से ज्यादा लंबी बाड़बंदी होगी। उसके लिए बीएसएफ को जमीन दी जा चुकी है। माहौल हिंदुत्व का है। जिस भीड़ ने अभिषेक पर हमला किया, उसमें से ‘जय सिया राम’ की आवाजें भी बुलंद थीं। धर्म चाहिए अथवा बुनियादी ढांचा दुरुस्त होना चाहिए? अच्छा है कि नई सरकार आने के बाद कथित घुसपैठिए बांग्लादेश बॉर्डर तक भाग रहे हैं, लेकिन यह इतना आसान काम नहीं है, जितना दिखाया जा रहा है। सवाल यह है कि सांसद की सुरक्षा का दायित्व अब किसका है? राज्य सरकार ने अभिषेक की जेड सुरक्षा छीन ली। यह सरकार का अपना मूल्यांकन होगा, लेकिन सांसद के साथ जब मारी-पीटी की जा रही थी, तब एक भी पुलिसिया चेहरा दिखाई नहीं दिया। घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बल के जवान वाहनों में तुरत-फुरत आए और सांसद को निकाल कर ले गए। सवाल यह भी है कि यदि सांसद के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो शर्मसार कौन होता? निश्चित तौर पर लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था…। इस संदर्भ में भाजपा सरकार को अभी शुरुआत करनी है। महज नारों से सरकारें नहीं चला करतीं। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा होती रही है। माकपा के बाद टीएमसी की सरकार पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं। इस मामले में भाजपा की परीक्षा अब होनी है, जो हिंसा खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई है।

Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
Exit mobile version