बेशक आरसीबी को लगातार, दोबारा आईपीएल चैंपियन बनाने में ‘विराट किंग’ कोहली का सर्वश्रेष्ठ योगदान रहा है। विराट रिटायरमेंट की दहलीज के भीतर आ चुके हैं। टेस्ट और ‘ताबड़तोड़’ टी-20 क्रिकेट से वह संन्यास ले चुके हैं। वह उम्र के ऐसे पड़ाव पर आ चुके हैं, जहां गेंद और बल्ले के समन्वय धुंधलाने लगते हैं। शॉट्स गलत साबित होने लगते हैं। विराट ने इन विरोधाभासों और अवरोधों को पछाड़ते, नकारते हुए आईपीएल, 2026 में 675 रन ठोंके हैं। एक शतक और पांच अद्र्धशतक तथा 56 से अधिक का औसत…! निश्चित ही वह ‘विराट’ और अतुलनीय हैं, लेकिन यह टूर्नामेंट एक 15-वर्षीय किशोर बल्लेबाज की विस्फोटकता की चर्चा के बिना अधूरा ही रहेगा। वह अद्भुत बालक है-वैभव सूर्यवंशी। वास्तव में वैभव ही आईपीएल, 2026 के ‘उन्नायक खिलाड़ी’ हैं। उन्हें टूर्नामेंट का ‘बेशकीमती खिलाड़ी’ (प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट), सबसे उभरता हुआ खिलाड़ी, दिग्गज खिलाडिय़ों की मौजूदगी के बावजूद 72 छक्कों का ‘किंग’, सबसे जानदार, शानदार, झन्नाटेदार स्ट्राइक रेट, ‘ओरेंज कैप’ विजेता (आश्चर्यजनक 776 रन), जिसमें एक शतक के अलावा 97, 96 रनों की दो पारियां भी शामिल हैं, उन्हें घोषित किया गया। सम्मान में कुल 3.10 करोड़ रुपए दिए गए। टाटा सिएरा कार भी मिली। यह राशि तब बनी है, जब वैभव की अनुबंध राशि 1.10 करोड़ रुपए और प्रति मैच फीस 7 लाख रुपए थी। अगले साल उनकी आईपीएल कीमत क्या होगी, आप कल्पना कर सकते हैं। ‘सदी के महानायक’ अमिताभ बच्चन की टिप्पणी सटीक और सार्थक है कि इस उम्र में वह कंचे, गुल्ली-डंडा जैसे खेल भी अच्छी तरह नहीं खेल पाते थे। यह सार्वभौमिक सत्य लगता है, क्योंकि हमने मंसूर अली खां पटौदी, सुनील गावस्कर, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, सहवाग, रोहित शर्मा, विराट कोहली, सूर्यकुमार यादव से लेकर मौजूदा दौर के युवा छक्केबाजों का खेल निरंतर देखा है।

यकीनन सभी मूल्यवान, अतुलनीय खिलाड़ी रहे हैं और आज भी हैं, लेकिन 15 साल का वैभव वाकई ‘अद्वितीय’ है। क्या आईपीएल के एक सत्र में 72 छक्कों की कल्पना की गई थी? वेस्टइंडीज के क्रिस गेल के 59 छक्के ‘चुनौतीहीन’ लगते थे और गेल एक अनुभवी बल्लेबाज भी थे, लेकिन 15 साल की उम्र और 145, 150 किमी. की गति वाली, तूफानी गेंदबाजों की, गेंदों पर एक बालक के धुआंधार छक्के….वाकई करिश्मा लगता है! सचमुच ‘अकल्पनीय’ है यह! किसने गढ़ा है इस ‘धुरंधर’ बल्लेबाज को..? आखिर उसकी तुलना किस महान खिलाड़ी से करें? क्रिकेट में छक्कों के विश्व चैंपियन रोहित शर्मा हैं। आंकड़ों में वह भी इस ‘बालक छक्केबाज’ से पीछे हैं। बहरहाल कुदरत ने कुछ खेल-प्रतिभाएं, कुछ सनसनीखेज खिलाड़ी, भारत की झोली में बख्शे हैं। वे सभी हमारी धरोहरें हैं, कीर्तिमान हैं, देश की आन-बान-शान हैं। इन्हें सहेज कर रखना है और वैश्विक स्तर पर तराशते रहना है। आजकल विश्व शतरंज में दिव्या देशमुख, विश्व चैंपियन गुकेश, चैंपियनों को धूल चटाने वाले प्रज्ञाननंदा, युवा सनसनी चिदंबरम की खूब चर्चा है। उन्होंने भारत को, खासकर तमिलनाडु को, शतरंज का गढ़ बना दिया है। उनके अलावा 100 मीटर दौड़ में धावक गुरिंदरवीर सिंह ने महानतम मिल्खा सिंह की स्मृतियां ताजा कर दीं। उन्हें ‘भारत का बोल्ट’ कहा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने यह दौड़ मात्र 10 सेकंड्स में पूरी की। बैडमिंटन में साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, महानतम प्रकाश पादुकोण, पुलेला गोपीचंद, किदांबी श्रीकांत की नई पीढ़ी में आयुष शेट्टी, दिव्या, उन्नति हुड्डा, मालविका सरीखे नवोदित चैंपियन सामने आए हैं। हॉकी, क्रिकेट और कुश्ती आदि खेलों में कई नए चेहरे, नए चैंपियन पहलवान आज हमारी ‘सांस्कृतिक संपदा’ हैं। वैभव भी इसी जमात के क्रिकेटर हैं। होनहार खिलाडिय़ों की सूची बहुत लंबी है, लिहाजा सभी का नाम देना संभव नहीं है, लेकिन यह देश के लिए चुनौती भी है। भारत अंतरराष्ट्रीय, खासकर ओलिंपिक खेलों में, बहुत पिछड़ा देश रहा है। कई बार हमारी झोली खाली भी रही है, लेकिन जो नाम उभर कर सामने आ रहे हैं और 2028 के ओलिंपिक खेलों में क्रिकेट भी होगी, तो भारत उम्मीदें रख सकता है। भारत आज भी टी-20 क्रिकेट का विश्व चैंपियन देश है। बेशक मोदी सरकार को इन
होनहार खिलाडिय़ों को वैश्विक स्तर की कोचिंग और अभ्यास उपलब्ध कराने चाहिए। खेलों की दृष्टि से भारत अभी भी चीन जैसे देश और अन्य देशों से काफी पीछे है। केंद्र सरकार को खेलों के लिए पर्याप्त बजट की व्यवस्था करनी होगी।

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