यदि पति या उसका परिवार नियंत्रण की आड़ में महिला के साथ शारीरिक या मानसिक क्रूरता (दहेज उत्पीडऩ, मारपीट) करता है, तो महिला के पास भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कानूनी सहायता लेने का पूरा अधिकार है। भारतीय समाज में कई बार बड़े बुजुर्गों या पारंपरिक मान्यताओं को लेकर पति-पत्नी के बीच टकराव हो जाता है। इन मामलों में धैर्य, समझदारी और आपसी बातचीत से समस्याओं का हल निकाला जाता है। पति-पत्नी के रिश्ते में नियंत्रण की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए, तो पारिवारिक काउंसलर की मदद लेना सबसे सुरक्षित और सकारात्मक विकल्प माना जाता है। पति-पत्नी के बीच मनमुटाव और टकराव को कम करने के लिए बेहतर है कि जो बात आपको पसंद नहीं है, उसे चिल्लाने या ताना मारने के बजाय शांति से और स्पष्ट रूप से बताएं…

अनेक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ पतियों द्वारा पत्नी को नियंत्रित करने या उन पर अनुचित रोक-टोक लगाने की कोशिश अक्सर रिश्ते में तनाव, असुरक्षा और अलगाव का कारण बन रही है। यह एक सामाजिक चिंतन का विषय है। पतियों द्वारा पत्नी को कंट्रोल करने के दृष्टिकोण और इसके परिणामों को मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देखना महत्त्वपूर्ण है। देखने में आ रहा है कि कई बार पति जाने-अनजाने में या जानबूझकर पत्नी को ज्यादा नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जैसे कि पत्नी के व्यक्तिगत फैसलों, करियर या कपड़ों पर अनुचित रोक-टोक लगाना। पत्नी को घर के खर्च या उसकी अपनी कमाई पर निर्णय न लेने देना। पत्नी को अपने परिवार, मायके या दोस्तों से मिलने से रोकना। पत्नी के फोन, सोशल मीडिया या दिनचर्या पर बेवजह नजर रखना। डार्क मनोविज्ञान के अनुसार अगर पति ये सोचे कि वो अपनी बीवी को बेडिय़ों में जकड़ सकता है तो ये ठीक नहीं है। सनद रहे कि पति-पत्नी जिंदगी की गाड़ी के दो पहिए होते हैं। अगर एक भी कमजोर पड़ा तो गाड़ी बेकार हो जाती है। वहीं आज का समय तो ऐसा है कि पति-पत्नी, दोनों को ही साथ मिलकर चलना होता है। ऐसे में अगर पति ये सोचे कि वो अपनी बीवी को बेडिय़ों में जकड़ सकता है तो ये पूरी तरह से गलत है। अपनी पत्नी पर नामुनासिब रोक-टोक करने से पति सिर्फ और सिर्फ अपना नुकसान करेंगे। अगर एक पति होने के नाते आप नहीं समझ पा रहे हैं कि आप अपने कंट्रोलिंग नेचर को कैसे काबू में करें, तो आपको गंभीरता से सोचना चाहिए।

अगर आप चाहते हैं कि आपकी शादीशुदा जिंदगी अच्छे से चलती रहे तो आपको ये समझने की जरूरत है कि अगर आप अपनी पत्नी को कंट्रोल करने की कोशिश करेंगे तो आपका रिश्ता खराब हो सकता है। बेहतर है कि आप पत्नी को वैचारिक तौर पर फ्री छोड़ें ताकि आपका रिश्ता खुलकर सांस ले सके। महिला स्वाभिमान का प्रश्न है। यह आपको इस बात का ख्याल रखना है कि आपकी पत्नी का भी किसी बात पर अपना विचार हो सकता है। ऐसे में उसकी कही गई किसी भी बात को नजरअंदाज करने की बजाय उनकी बात को ध्यान से सुनें। उन्हें ये एहसास कराएं कि उनका किसी भी बात में अपनी बात रखना उतना ही जरूरी है जितना आपका पति होने के कारण है। कुछ पतियों को लगता है कि पत्नी के आत्मनिर्भर या अधिक स्वतंत्र होने से उनका वर्चस्व कम हो जाएगा। पितृसत्तात्मक सोच के कारण कुछ पुरुष यह मान लेते हैं कि पत्नी पर उनका अधिकार है। याद रहे पत्नी पति की खरीदी हुई संपत्ति तो नहीं होती, न ही पति कोई किसी रजिया सुल्तान का गुलाम होता है। बातचीत की कमी और एक-दूसरे के विचारों को न समझ पाना भी एक बड़ी समस्या है। पत्नी को नियंत्रित करने की कोशिश करने से वैवाहिक बंधन कमजोर हो जाता है और पति को नियंत्रित करना भी घर में अशांति, मानसिक तनाव और अलगाव की स्थिति पैदा कर देता है। इसका खुशनुमा हल यह है कि समस्याओं को बातचीत के जरिए सुलझाएं और एक-दूसरे की बात सुनें। क्या गलत है, पति-पत्नी एक-दूसरे के व्यक्तिगत स्पेस और स्वतंत्रता का सम्मान करें। ऐसा नहीं है कि सिर्फ मर्द ही औरतों को कंट्रोल करके रखना चाहते हैं, आजकल महिलाओं में भी ऐसा बर्ताव देखने को मिल रहा है। मनोविज्ञान कहता है कि पति को कंट्रोल करके रखने वाली पत्नियां तर्क-वितर्क में बेहद तेज होती हंै। मतलब उनसे बहसबाजी में जीत पाना मुश्किल होता है। वो कहीं न कहीं से कोई बात निकालकर खुद को सही और आपको गलत साबित करके ही दम लेती हैं। अगर ऐसा है, तो समझ जाएं कि पत्नी आपको नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।

मनोविज्ञान के अनुसार, कुछ कंट्रोलिंग पत्नियों की एक बहुत ही अजीब बात होती है कि वो आपके हर एक काम में कोई न कोई खामियां निकाल ही लेंगी और फिर उस पर आपको बातें सुनाएंगी। आप पर सही से काम करने का प्रेशर बनाती हैं और ऐसा दर्शाती हैं जैसे उनके बिना आप कोई काम ढंग से कर ही नहीं सकते। पार्टनर को ये बताना कि कहां जा रहे हैं, कहीं से भी गुलामी नहीं दर्शाता, बल्कि ये आपसी प्यार और विश्वास को जताने का एक तरीका होता है। लेकिन अगर आपकी पत्नी बताने के बावजूद आपको बार-बार फोन करके आपके हर एक पल पर नजर रखे हुए है, तो ये सही बात नहीं है। यह तो आपसी विश्वास की कमी है। यही नहीं उन्हें आपका दोस्तों के साथ वक्त बिताना, छुट्टी वाले दिन घर में न रहने से भी अगर प्रॉब्लम होती है, तो ये कहीं न कहीं पत्नी द्वारा ओवर कंट्रोल करने की निशानी है। भारतीय कानून पति और पत्नी दोनों के अधिकारों व सम्मान की रक्षा करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार पति का पत्नी के निजी ‘स्त्रीधन’ (गहने, उपहार और संपत्ति जो उसे अपने परिवार से मिले हैं) पर कोई कानूनी नियंत्रण नहीं होता।

सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यदि पति घर के खर्चों का हिसाब-किताब रखता है या वित्तीय मामलों में निर्णय लेता है, तो जब तक कोई ठोस शारीरिक या मानसिक क्रूरता साबित न हो, इसे अपने आप में अपराध या प्रताडऩा नहीं माना जा सकता। यदि पति या उसका परिवार नियंत्रण की आड़ में महिला के साथ शारीरिक या मानसिक क्रूरता (दहेज उत्पीडऩ, मारपीट) करता है, तो महिला के पास भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कानूनी सहायता लेने का पूरा अधिकार है। भारतीय समाज में कई बार बड़े बुजुर्गों या पारंपरिक मान्यताओं को लेकर पति-पत्नी के बीच टकराव हो जाता है। इन मामलों में धैर्य, समझदारी और आपसी बातचीत से समस्याओं का हल निकाला जाता है। पति-पत्नी के रिश्ते में नियंत्रण की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए, तो पारिवारिक काउंसलर की मदद लेना सबसे सुरक्षित और सकारात्मक विकल्प माना जाता है। पति-पत्नी के बीच मनमुटाव और टकराव को कम करने के लिए बेहतर है कि जो बात आपको पसंद नहीं है, उसे चिल्लाने या ताना मारने के बजाय शांति से और स्पष्ट रूप से बताएं। पति-पत्नी के रिश्ते में ‘कौन सही है’ यह साबित करने के बजाय, रिश्ते को प्राथमिकता दें। कभी-कभी गलती न होने पर भी झुक जाना समझदारी होती है। दिनभर की भागदौड़ के बाद एक-दूसरे के साथ कुछ अच्छा समय बिताएं और आपसी भावनाओं को समझें। पुरानी गलतियों को माफ करें, पुरानी बातों को बार-बार कुरेदने से बचें। याद रहे दांपत्य जीवन में माफ करना और आगे बढऩा एक मजबूत रिश्ते की नींव है।-डा. वरिंद्र भाटिया

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