अहमदाबाद: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने 1993 बैच के आईपीएस ज्ञानेंद्र सिंह मलिक (जी एस मलिक) को राज्य को नया पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किया है। अभी डॉ. के एल एन राव इंचार्ज डीजीपी के तौर पर काम संभाल रहे थे। गुजरात के डीजीपी विकास सहाय के पिछले साल के अंत में एक्सटेंशन पीरियड पूरा करने के बाद राव को कमान मिली थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गुजरात सरकार ने डीजीपी के पद नियमित नियुक्ति कर दी है। जी एस मलिक अभी तक अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर थे। वे हाल के सालों में दूसरे अहमदाबाद सीपी हैं जो डीजीपी बने हैं। इससे पहले आशीष भाटिया अहमदाबाद सीपी से डीजीपी बने थे।

तेजतर्रार ऑफिसर की है छवि
मूलरूप से हरियाणा के रहने वाले जी एस मलिक की छवि एक कड़क ऑफिसर की है। वे अहमदाबाद पुलिस आयुक्त बनने से पहले बीएसएफ की प्रतिनियुक्ति पर थे। उन्होंने अहमदाबाद सीपी रहते हुए अवैध बांग्लादेशियों के गढ़ बने चंडोला झील पर राज्य के सबसे बड़े अतिक्रमणरोधी अभियान की अगुवाई की थी। बुलडोजर एक्शन में पूरे चंडोला झील इलाके को खाली कराया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान एक भी अप्रिय घटना नहीं घटी थी। इससे पहले जीएस मलिक भरूच एसपी के तौर पर तब वहां के बाहुबली विधायक छोटू वसावा को अरेस्ट करने और पूर्व में पोरबंदर एसपी रहते हुए गुजरात की गॉडमदर संतोखबेन जडेजा को शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

भुज में मिली थी पहली पोस्टिंग

ज्ञानेंद्र सिंह मलिक (G S Malik) गुजरात कैडर के 1993 बैच के IPS ऑफिसर हैं। वे हरियाणा के फरीदाबाद जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी टेक और गुजरात यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया है। ट्रेनिंग के बाद उन्हें एएसपी भुज के तौर पर पोस्ट किया गया। उन्होंने छह जिलों (डांग्स, पोरबंदर, सुरेंद्रनगर, अहमदाबाद रूरल, भरूच और कच्छ) के डिस्ट्रिक्ट एसपी और 4 रेंज (बॉर्डर, अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत रेंज) के हेड के तौर पर काम किया है। उन्होंने गुजरात के गवर्नर के एडीसी और अहमदाबाद शहर के डीसीपी (क्राइम ब्रांच) के साथ अहमदाबाद और वडोदरा शहरों में एडिशनल कमिश्नर के तौर पर भी काम किया है।

मलिक को है लंबा अनुभव

जी एस मलिक ने सीआईडी (क्राइम), CID (इंटेलिजेंस), एंटीकरप्शन ब्यूरो, प्रोहिबिशन और एक्साइज डिपार्टमेंट और होम डिपार्टमेंट में सेक्रेटरी के तौर पर भी काम किया है। 2014 से 2018 तक, एडिशनल डायरेक्टर एसीबी/सेक्रेटरी (होम)/IGP वडोदरा और सूरत रेंज को संभाल चुके हैं। मलिक को तीन बार पुलिस कांस्टेबलों के लिए रिक्रूटमेंट बोर्ड का चेयरमैन भी बनाया गया। उनके कार्यकाल में लगभग 24,000 कांस्टेबलों की भर्ती सबसे सही तरीके से की गई। मलिक ने चेयरमैन रहते हुए हर बार 10 महीने से भी कम समय में रिजल्ट घोषित किए गए। इस तरह आज के गुजरात पुलिस के लगभग 20% जवानों की भर्ती उस बोर्ड ने की है जिसके वे चेयरमैन थे।

पांच साल केंद्र में तैनात रहे मलिक

मलिक लगभग पांच साल तक सेंट्रल डेप्युटेशन पर रहने के दौरान 4 साल तक बीएसएफ में गुजरात फ्रंटियर के इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर काम किया। उन्होंने आर्मी और एयर फोर्स की मदद से कच्छ के हरामी नाला में पहली बार एक बहुत ही हिम्मत वाले हेलीबोर्न ऑपरेशन को खुद सुपरवाइज किया, जिसके नतीजे में 11 पाकिस्तानी बोट जब्त की गईं और छह पाकिस्तानी घुसपैठिए पकड़े गए। बीएसपी में सेवा देने के बाद वह सीआईएसएफ में भी पोस्टेड रहे, जिस दौरान वे एडीजी (नॉर्थ) के तौर पर पोस्टेड थे। मलिक ने 2002 में एक साल के लिए कोसोवो, यूगोस्लाविया में यूनाइटेड नेशन के पीसकीपिंग मिशन में भी काम किया है। जहां वे वॉर क्राइम इन्वेस्टिगेशन से जुड़े थे।

IPS बनने से पहले ओएनजीसी में काम किया

आईपीएस जॉइन करने से मलिक ने कुछ समय तक बॉम्बे हाई में ओएनजीसी और इंडियन रेलवे में भी काम किया था। मलिक को ऑफिसर को मेरिटोरियस सर्विस के लिए पुलिस मेडल और डिस्टिंग्विश्ड सर्विस के लिए प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया है। मलिक के अहमदाबाद सीपी रहते हुए 2025 में यूरोपियन संस्था Numbeo के जारी किए गए डेटा के अनुसार अहमदाबाद को भारत का सबसे सुरक्षित शहर बताया गया था।

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