देहरादून: छत्तीसगढ़ की बेटी आईपीएस श्वेता चौबे टिहरी जिले की एसएसपी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। आईपीएस श्वेता चौबे अपने परिवार में तीसरी जनरेशन की अफसर हैं।
श्वेता को लेडी सिंघम , उत्तराखंड की शेरनी कई नामों से पुलिस महकमे में जाना जाता है। उनकी उपलब्धियां और अवार्ड की लिस्ट काफी बड़ी है। श्वेता इससे पूर्व एसपी चमोली, एसएसपी पौड़ी, समेत कई अहम पदों की जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
आईपीएस की बेटी
श्वेता चौबे छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एसपी रहे दिवंगत आईपीएस विजय शंकर चौबे की बेटी हैं। आईपीएस विजय शंकर को दो बार राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुए थे। वे छत्तीसगढ़ के डीजीपी भी रह चुके हैं। वो प्रदेश के सारंगढ़ के निवासी थे। श्वेता का बचपन दुर्ग जिले सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी व्यतीत हुआ।
यूकेपीएससी परीक्षा पास की
श्वेता उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली आ गईं। इसके बाद उन्होंने यूकेपीएससी की परीक्षा पास की और डीएसपी का पद संभाला। पुलिस विभाग में उनके कार्यों से अधिकारी बहुत प्रभावित हुए। धीरे- धीरे जो जो जिम्मेदारी उन्हें मिली, वह बखूबी निभाती रहीं। विभागीय पदोन्नति के बाद आईपीएस अवार्ड हुआ। इस बीच उन्होंने कई उपलब्धि हासिल की।
परिवार में कौन
साल 2005 जुलाई में जब वह नैनीताल ATI ऑफिसर की ट्रेनिंग कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात मणिकांत मिश्रा से हुई। इसके बाद दोनों ने साथ रहने का निर्णय लिया। दोनों परिवारों में सहमति बनने के बाद 6 दिसंबर 2006 को श्वेता चौबे और मणिकांत मिश्रा का विवाह हो गया। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। मणिकांत मिश्रा भी पुलिस विभाग के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी में हैं। जो कि कई जिलों की कमान संभाल चुके हैं।
उपलब्धियां-
- 79वें स्वतंत्रता दिवस पर विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित
- मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित
- राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित
- उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन पिंक’ के लिए स्कोच अवॉर्ड से सम्मानित किया गया
- उत्तराखंड में फर्जी शिक्षक घोटाले की परत खोलने में आइपीएस श्वेता चौबे की अहम भूमिका रही। आठ माह के अंदर उन्होंने 65 फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया।
- 2013 में आई केदारनाथ आपदा में उनकी ड्यूटी कंट्रोल रूप में लगी। डेढ़ महीने तक चले रेस्क्यू के दौरान उन्होंने बेहतर समन्वय बनाया, जरूरतमदों तक राहत सामग्री पहुंचाई। बेहतर कार्य के लिए उन्हें मुख्यमंत्री सराहनीय सेवा पदक प्रदान किया गया।
- वर्ष 2016 के हरिद्वार अर्द्धकुंभ में भी उनका प्रदर्शन बेहतर रहा।
- देहरादून में एसपी सिटी रहते उन्होंने कई बड़े मामलों को लीड किया। महिला सुरक्षा के लिए चलाए गए ‘ऑपरेशन पिंक’ को काफी सराहना मिली। जिसे उन्होंने हर जिले में चलाया।
- कोविडकाल में श्वेता चौबे ने पुलिसिंग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण पेश किया। बच्चों से दूर रहकर जरूरतमंदों के घर-घर राशन पहुंचाने और बाहरी राज्यों के लोगों को उनके घर भिजवाने में अहम भूमिका निभाई।
- धराली में बादल फटने से हुए भारी नुकसान में राहत और बचाव कार्य के लिए विशेष टीम में श्वेता चौबे भी शामिल थीं।

