Common Brain Tumour Myths And Facts: ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डर बैठ जाता है. फिल्मों, सोशल मीडिया और अधूरी जानकारियों की वजह से इसके बारे में कई ऐसी धारणाएं बन गई हैं जो पूरी तरह सही नहीं हैं. हकीकत यह है कि ब्रेन ट्यूमर एक मुश्किल बीमारी है और इसके बारे में फैली गलतफहमियां कई बार मरीजों और उनके परिवारों को जरूरत से ज्यादा डराने का काम करती हैं. यही कारण है कि विशेषज्ञ समय-समय पर इन मिथकों को दूर करने की सलाह देते हैं. एस्टर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज एंड स्पाइन केयर के ग्रुप डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सतीश रुद्रप्पा के अनुसार, कई बार बीमारी से ज्यादा नुकसान उसके बारे में फैली गलत जानकारी पहुंचाती है.
क्या ब्रेन ट्यूमर कैंसर होता है?
सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर होता है. डॉ. सतीश रुद्रप्पा बताते हैं कि सभी ब्रेन ट्यूमर कैंसरयुक्त नहीं होते. कई ट्यूमर ऐसे होते हैं, जो शरीर के दूसरे हिस्सों में नहीं फैलते. हालांकि, ब्रेन के भीतर जगह सीमित होने के कारण ऐसे ट्यूमर भी दबाव बनाकर बोलने, चलने, याददाश्त, देखने या संतुलन जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए किसी ट्यूमर की गंभीरता केवल उसके कैंसर होने या न होने से तय नहीं होती, बल्कि उसकी स्थिति, आकार और बढ़ने की गति भी महत्वपूर्ण होती है.
क्या सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का लक्षण है?
एक और आम धारणा है कि ब्रेन ट्यूमर का पहला लक्षण हमेशा सिरदर्द होता है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसा जरूरी नहीं है. डॉ. रुद्रप्पा के मुताबिक, हर मरीज में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. कुछ लोगों में दौरे पड़ना, नजर कमजोर होना, बोलने में परेशानी, हाथ-पैरों में कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या व्यवहार में बदलाव जैसे संकेत सिरदर्द से पहले भी दिखाई दे सकते हैं. यही वजह है कि लगातार बने रहने वाले न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
किन लोगों को होता है ब्रेन ट्यूमर?
कई लोग यह भी मानते हैं कि ब्रेन ट्यूमर सिर्फ बुजुर्गों को होता है. जबकि सच्चाई यह है कि यह किसी भी उम्र में हो सकता है. बच्चों, युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी विभिन्न प्रकार के ब्रेन ट्यूमर देखे जाते हैं. इसलिए उम्र कम होने के कारण लक्षणों को हल्के में लेना सही नहीं है.
मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर का संबंध क्या है?
मोबाइल फोन के इस्तेमाल और ब्रेन ट्यूमर के बीच संबंध को लेकर भी लंबे समय से बहस चल रही है. डॉ. सतीश रुद्रप्पा का कहना है कि दुनिया भर में कई दशकों से इस विषय पर रिसर्च किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस साइंटफिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि सामान्य रूप से मोबाइल फोन का इस्तेमाल सीधे ब्रेन ट्यूमर का कारण बनता है. यूएस नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट भी बताती है कि बड़े स्टडी में मोबाइल फोन के नियमित उपयोग और ब्रेन ट्यूमर के जोखिम के बीच स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया है.
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

