कई लोग सर्दी, जुकाम और बुखार या पेट दर्द जैसी समस्याओं के लिए खुद से ही दवाएं ले लेते हैं. लेकिन कई बार खुद से डॉक्टर बन जाना और किसी एक्सपर्ट की सलाह के बिना दवाएं लेना खतरनाक साबित होता है. बहुत से लोग बच्चों को भी बड़ों की टैबलेट दे देते हैं. वह टुकड़ों में बांट कर एडल्ट्स की दवाओं को बच्चों को दे देते हैं या खुद भी तोड़ कर दवाओं का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कभी-कभी बेहद खतरनाक हो सकता है. किसी भी टैबलेट को बिना पूरी जानकारी के तोड़ना और उसे लेना घातक भी साबित हो सकता है. अगर आप भी इसी का जवाब चाहते हैं, तो बिल्कुल सही जगह पर हैं. क्योंकि हाल ही में हमें MBBS Mid Patel के इंस्टाग्राम पर एक ऐसा ही वीडियो मिला. तो चलिए बिना किसी देरी के जानते हैं.

किन टैबलेट्स को तोड़ा जा सकता है-

जिन टैबलेट पर ठीक बीचों बीच एक लाइन (Score Line) बनी होती है, उनका मतलब आमतौर पर यह होता है कि उन्हें तोड़ा जा सकता है. यह कट का निशान, टैबलेट को साफ-साफ तोड़ने में मदद करता है, ताकि उसके दो बराबर हिस्से हो सकें. हालांकि सिर्फ लाइन के आधार पर दवा को न तोड़े. इसके अलावा भी आपको दवा के लेबल या मरीज के लिए दी गई जानकारी वाली पर्ची (पैकेज इंसर्ट) में भी जानकारी मिल सकती है.

ऐसी गोलियां जिन्हें कभी नहीं तोड़ना चाहिए-

अगर गोली पर कोई स्कोर लाइन नहीं है, तो इसे एक साफ संकेत मानें कि इसे तोड़ने के लिए नहीं बनाया गया है. इस कैटेगरी में आने वाली दवाएं हैं:

एक्सटेंडेड-रिलीज (धीरे-धीरे असर करने वाली) गोलियां-

ऐसी गोली को काटना जिसे धीरे-धीरे दवा छोड़ने के लिए बनाया गया है, उस तय देरी के असर को खत्म कर देता है. इस तरह की गोली को तोड़ने से पूरी डोज एक ही बार में शरीर में जा सकती है और यह बहुत खतरनाक हो सकता है.

लिक्विड या छोटे दानों (बीड्स) से भरे कैप्सूल-

इन्हें काटने से न सिर्फ गंदगी फैलती है, बल्कि लिक्विड या दानों वाले कैप्सूल को काटने के बाद सही डोज का पता लगाने का कोई अच्छा तरीका भी नहीं है.

बहुत छोटी टैबलेट-

ऐसी किसी भी गोली को काटने से बचें जिसके लिए बहुत ज्यादा सर्जिकल सटीकता की जरूरत हो.

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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