हैदराबाद: हैदराबाद एक ग्लोबल शहर के तौर पर उभर रहा है और कई मल्टीनेशनल कंपनियों को अपनी ओर खींच रहा है। ये कंपनियां न सिर्फ शहर में निवेश कर रही हैं, बल्कि यहां अपने ऑफिस भी खोल रही हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ़्ट और अमेजन जैसी बड़ी ग्लोबल कंपनियां शहर में अपनी ब्रांच खोल रही हैं। इस सिलसिले में तेलंगाना सरकार अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को कई तरह की रियायतें और मौके दे रही है। इसी पहल के तहत हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (American Consulate) तक जाने वाली सड़क का नाम ट्रंप के नाम पर रखा जाएगा। इस महीने की 23 तारीख को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी आधिकारिक तौर पर इस सड़क का नाम डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू रखेंगे।
सीपीआईएम नेता ने क्या कहा?
उधर, सीपीआई(एम) नेता एमए बेबी ने तेलंगाना सरकार की इस पहल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि वियतनाम में अमेरिकी युद्ध के चरम पर भारत ने महान साम्राज्य-विरोधी नेता के सम्मान में कोलकाता में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हैरिंगटन स्ट्रीट का नाम बदलकर हो ची मिन्ह सरणी कर दिया था। अब, ऐसे समय में जब आक्रामक अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध, गाजा में नरसंहार, वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप और क्यूबा पर आपराधिक शिकंजा कसे हुए हैं। ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी हैदराबाद में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी सड़क का नाम डोनाल्ड ट्रम्प के सम्मान में बदल रहे हैं। जो कि मानवता के खिलाफ साम्राज्यवादी युद्ध का वर्तमान चेहरा हैं और हमारे समय के हिटलर बनने की आकांक्षा रखते हैं।
अमेरिका नौसेना के हमले का जिक्र
एमए बेबी ने आगे कहा कि कुछ ही दिन पहले अमेरिकी नौसेना ने एक निहत्थे वाणिज्यिक जहाज पर हमला किया और तीन भारतीय नाविकों की जान ले ली। जहां अमेरिकी सरकार ने अपने हमले जारी रखने की धमकी दी है, वहीं भारत सरकार इस कायराना मिसाइल हमले के खिलाफ उचित विरोध दर्ज कराने में विफल रही है, और मोदी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। बीजेपी को भारत की संप्रभुता और आत्म-सम्मान से समझौता करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है और अब ऐसा लगता है कि तेलंगाना में कांग्रेस सरकार को भी इससे कोई गुरेज नहीं है।
कांग्रेस से गुजारिश
उन्होंने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि कांग्रेस आलाकमान इस अपमानजनक कदम पर ध्यान देगा और यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करेगा कि इसे वापस लिया जाए। हमारे साम्राज्य-विरोधी प्रतिरोध आंदोलन के आदर्शों को आगे बढ़ाने के दावे केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए।
हैदराबाद में कब होगा ट्रंप के नाम की सड़क का उद्घाटन
दरअसल मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, 4 जुलाई को मनाए जाने वाले अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पहले IT कॉरिडोर में स्थित इस सड़क का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। सरकारी सूत्रों से पता चला है कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। रेवंत रेड्डी सरकार ने पिछले साल दिसंबर में हुए तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट से पहले ही अमेरिकी वाणिज्य दूतावास वाली सड़क का नाम ट्रंप के नाम पर रखने का फ़ैसला किया था। सरकार ने यह फैसला तेलंगाना और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों को दिखाने के लिए लिया था।
तेलंगाना सरकार क्यों उठा रही ये कदम?
तेलंगाना सरकार के सूत्रों का कहना है कि सड़क का नाम ट्रंप के नाम पर रखने का फैसला उन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के योगदान को सम्मान देने के लिए किया गया जो हैदराबाद के विकास में मदद कर रही हैं और उन देशों को भी सम्मान देने के लिए जो इस विकास में सहयोग करते हैं। रेवंत रेड्डी सरकार हैदराबाद की मुख्य सड़कों का नाम गूगल और माइक्रोसॉफ़्ट जैसी अंतरराष्ट्रीय IT कंपनियों के नाम पर रखने के प्रस्तावों पर भी विचार कर रही है। जानकारों का कहना है कि यह कदम तेलंगाना और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार, टेक्नोलॉजी और निवेश के रिश्तों को दिखाता है।
हैदराबाद में किन कंपनियों ने बनाया हब
इस बीच फार्मा, डिफ़ेंस और एयरोस्पेस जैसे अहम सेक्टर की कई अमेरिकी फ़ॉर्च्यून 500 कंपनियां हैदराबाद में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) स्थापित कर रही हैं। पिछले दो सालों में कॉस्टको (Costco), एली लिली (Eli Lilly), मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s), वैनगार्ड (Vanguard) और टी-मोबाइल (T-Mobile) जैसी कंपनियों ने शहर में अपना कामकाज शुरू किया है। नैसकॉम (NASSCOM) की ‘GCC लैंडस्केप रिपोर्ट – 2026’ के अनुसार, 2025 में देश में स्थापित नए बैंकिंग, फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ और इंश्योरेंस (BFSI) GCC में से आधे अकेले हैदराबाद में ही स्थापित किए गए थे।

