रायपुर। एक बाप के दो बेटे सगे भाइयों को अलग-अलग सामाजिक दर्जा दिए जाने से व्यथित पहाड़ी कोरवाओं के प्रतिनिधि मंडल ने प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के नेतृत्व में आज महामहिम राज्यपाल से मिलकर अपनी दुखड़ा सुनाया। प्रतिनिधि मंडल में शामिल कोरवाओं के मार्गदर्शक टीकाराम पटेल ने पहाड़ी कोरवाओं के व्यथा को विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि विकास खंड धरमजयगढ़ के सरहदी क्षेत्रों बरघाट,छुहीपहाड़,टेढ़ासेमर क्षेत्र में देखने को मिला है कि एक भाई सरगुजा जिला में है उसे विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा प्राप्त लेकिन उदयपुर धरमजयगढ़ क्षेत्र में रहने वाले पहाड़ी कोरवाओं को यह दर्जा प्राप्त नहीं है और न ही उनके जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। महामहिम राज्यपाल अनुसुइया उइके को इनकी रहन सहन,बोली भाषा, पूजा पद्धति,खान पान पहनावा ओढ़ावा भी एक है। लेकिन हम एक बाप के दो भाइयों को अलग-अलग दर्जा देकर आपस में लड़ा दिया गया है। बातों को गंभीरता पूर्वक सूनकर संतोषजनक जवाब देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में भारिया जनजाति के साथ भी ऐसी स्थिति है इनकी कुल जनसंख्या साठ हजार है लेकिन विशेष पिछड़ी जनजाति का दर्जा केवल बारह सौ भारिया जनजाति के लोगों को मिला है। इसी प्रकार मार्गदर्शक जागेश्वर यादव ने भी महामहिम के समक्ष कई तथ्य रखे और इन्हे विशेष पिछड़ी जनजाति घोषित करने की मांग की। प्रतिनिधि मंडल में वनवासी कल्याण आश्रम के छत्तीसगढ़ प्रांत सह संगठन मंत्री रामनाथ कश्यप, जिला पहाड़ी कोरवा विकास समिति के अध्यक्ष प्रेमसाय, सचिव रामचरण, कोषाध्यक्ष मानसाय,शनिराम, चानीराम एवं दीपक चौहान सम्मिलित थे।
जूदेव को याद कर भावुक हुए महामहिम


जब प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने अपना परिचय दिया तो तुरंत महामहिम ने पूछा आप दिलीप सिंह जूदेव जी के लड़के हैं तब प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने फिर कहा कि हां मैं दिलीप सिंह जूदेव जी का दुसरा पुत्र हूं और एक छोटे भाई युद्धवीर सिंह जूदेव हैं। और पूराने दिनों को याद करते हुए कहने लगे 1988 के खरसिया विधानसभा के उप चुनाव में मैं भी कांग्रेस की ओर से प्रचार करने गई थी। लेकिन तब मैंने देखा जूदेव जी को चाहने वालों का जूनून, भगवान की तरह मानते थे लोग। और तात्कालिक मुख्यमंत्री के साथ वे चुनाव हार गए थे। उसके बाद जब भी मिलते तो मजाकिया तौर पर कहते आपके वजह से मैं चुनाव हार गया। इसके बाद प्रबल प्रताप सिंह जूदेव की बातें सूनी उन्होंने भी पहाड़ी कोरवाओं को समान दर्जा देने की बात कही और एक जनजातिय सम्मेलन में धरमजयगढ़ और जशपुर आने का न्योता दिया जिसे उन्होंने ने सहर्ष स्वीकार करते हुए फरवरी मार्च में कार्यक्रम बनाने की बात कही। फिर महामहिम राज्यपाल कुर्सी से उठे और लान की ओर बुलाकर अलग से बातचीत की।
पहाड़ी कोरवाओं ने सौंपा तीर कमान


पहाड़ी कोरवाओं के प्रतिनिधि मंडल ने महामहिम राज्यपाल महोदया को अपना पारंपरिक हथियार तीर कमान सौंपते हुए कहा कि तीर कमान तो कई जनजाति के लोग रखते हैं लेकिन पहाड़ी कोरवाओं का तीर दो उंगलियों से चलाया जाता है। क्योंकि वे अपने अंगूठा अपने गुरु को दान करने वाले एकलव्य को अपना आदर्श मानते हैं। भेंट के रुप में तीर कमान पा कर जिज्ञासा वश कई सवाल महामहिम ने पूछे जिसका जवाब प्रेमसाय ने दिया। राज्यपाल ने स्वयं धनुष चलाने की कोशिश की बाद में रामचरण ने धनुष चलाने का तरीका बताया।

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