दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक ऐसे शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है. जिसने अपनी ही कंपनी का भरोसा तोड़कर करीब 9 करोड़ रुपये की ठगी कर डाली. आरोपी कई महीनों से फरार चल रहा था और अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था. पुलिस ने उसे राजस्थान के ब्यावर से अरेस्ट कर लिया.
कंपनी का मैनेजर ही निकला सबसे बड़ा गुनहगार
दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुभाष शर्मा के रूप में हुई है. वह लॉजिस्टिक्स कंपनी में मैनेजर और अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था. करीब 5 साल से नौकरी करने के कारण कंपनी के मालिकों का उस पर पूरा भरोसा था. इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया.
जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी वर्क ऑर्डर तैयार करता था और कंपनी से ट्रकों की एडवांस पेमेंट निकलवाता था. उसने नकली ट्रांसपोर्टरों और फर्जी सप्लायरों के नाम पर करोड़ों रुपये हासिल किए. माल ढुलाई के नकली रिकॉर्ड और फर्जी डिलीवरी रसीदें भी तैयार की गईं. हैरानी की बात यह है कि जिन वाहनों को रिकॉर्ड में 40 टन माल ढोने वाला बताया गया वे असल में एक टन वजन भी नहीं उठा सकते थे.
नकली चेक, फर्जी कंपनियां और करोड़ों की हेराफेरी
आरोपी ने भुगतान लेने के लिए कई फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खड़े किए. कंपनी से निकाली गई रकम पहले इन खातों में पहुंचाई गई और बाद में नकद निकाली गई या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई. कई ऐसे चेक भी दिए गए जो बंद खातों के थे या जिन खातों का संबंधित ग्राहकों से कोई लेना-देना नहीं था.
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी लगातार दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में अपने ठिकाने बदलता रहा. गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने कई पहचान और पते बदलने की कोशिश की लेकिन EOW की टीम लगातार उसकी तलाश में जुटी रही.
राजस्थान से दबोचा गया भगोड़ा आरोपी
दिल्ली पुलिस की EOW यूनिट की टीम ने टेक्निकल और मानवीय सूचना के आधार पर आरोपी का सुराग लगाया. आखिरकार 18 जून 2026 को राजस्थान के ब्यावर स्थत टिकराना गुर्जर इलाके से उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस का मानना है कि पूछताछ में करोड़ों रुपये की इस धोखाधड़ी से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं. यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी ने अकेले वारदात को अंजाम दिया या उसके साथ कोई और भी शामिल था.

