श्री पीयूष गोयल

यूके के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता, जो 15 जुलाई से लागू होगा, भारतीय किसानों, एमएसएमई, मछुआरों, स्टार्टअप और कारीगरों के लिए वैश्विक अवसर और समृद्धि लाएगा। यह नौकरियां सृजित करेगा और भारतीय नागरिकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले सामान को उचित कीमतों पर उपलब्ध कराएगा, जिससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 मिशन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत और यूके के बीच परिवर्तनकारी व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (सीईटीए) भारतीय वस्तुओं के लिए यूके में सभी क्षेत्रों में, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित करेगा। दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद यह समझौता लगभग 100% व्यापार मूल्य को शामिल करते हुए लगभग 99% टैरिफ लाइनों पर तुरंत शुल्क समाप्त करेगा, जिससे भारतीय निर्यात के लिए अपार अवसर सृजित होंगे।
सीईटीए एक जन-केंद्रित समझौता है, जिस पर पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर की उपस्थिति में हस्ताक्षर किये गये थे। यह समाज के हर हिस्से को फायदे देता है। किसानों को अपने घरेलू हितों से समझौता किए बिना उच्च मूल्य वाले निर्यात बाजारों तक पहुंच मिलेगी। मछुआरों को विशाल यूके बाजार में अधिक सीफ़ूड निर्यात से फायदा मिलेगा। श्रमिकों को श्रम-गहन क्षेत्रों में नई नौकरियों के अवसर मिलेंगे। महिला उद्यमी, युवा, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को वैश्विक मूल्य-श्रृंखला तक बेहतर पहुँच मिलेगी। पेशेवरों को बेहतर आवागमन और मान्यता के अवसरों से फायदा मिलेगा।
किसानों के लिए समृद्धि
सीईटीए भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम यूके बाजार खोलता है, जो दूसरे यूरोपीय देशों को मिलने वाले फायदों के बराबर या उनसे भी बेहतर है। हल्दी, काली मिर्च, इलायची और प्रसंस्कृत सामान जैसे आम का गूदा, अचार और दालों को शुल्की-मुक्त पहुँच प्राप्त होगा। उच्च कृषि निर्यात से किसानों की आय बढ़ेगी और गुणवत्ता, पैकेजिंग और प्रमाणन के लिए और प्रोत्साहन मिलेगा। यह कृषि मूल्य श्रृंखला में कई नौकरियाँ भी पैदा करेगा।
साथ ही, सीईटीए घरेलू किसानों – खासकर डेयरी उत्पाद, खाद्यान्न, मोटे अनाज, सेब, ओट्स और खाद्य तेल से जुड़े किसानों – की सुरक्षा के लिए भारत के सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को अपने दायरे से बाहर रखता है। इन्हें समझौते से बाहर रखना, मोदी सरकार की खाद्य सुरक्षा, घरेलू मूल्य स्थिरता और कमजोर कृषि समुदायों को प्राथमिकता देने की रणनीति को प्रतिबिंबित करती है।
उद्योग को बढ़ावा
यूके के विशाल बाजार तक तुरंत शुल्क-मुक्त पहुंच भारतीय निर्माण को बढ़ावा देगी, जिससे पारंपरिक कारीगर, बड़े कारखाने और क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्र प्रभावी तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। छोटे व्यवसायों को फायदा होगा, क्योंकि भारतीय उत्पादों को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर प्रतिस्पर्धा से जुड़ी स्पष्ट बढ़त मिलेगी। फुटबॉल, क्रिकेट गियर, रग्बी बॉल और खिलौने बनाने वाली कंपनियां, अन्य उत्पादों के साथ-साथ, यूके में अपने व्यवसाय को काफी विस्तार देने में सक्षम होंगी।
शुल्कों को हटाने से खासकर श्रम-सघन क्षेत्रों में लंबे समय से चल रही टैरिफ बाधाओं का समाधान हुआ है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा और पैमाने में तुरंत लाभ होने की उम्मीद है। तिरुपुर के करघों से लेकर बेंगलुरु की लैब तक, सूरत के हीरे के कारीगरों से लेकर हैदराबाद के कोडर्स तक, यह समझौता असली अर्थव्यवस्था को छूता है।
सेवाएँ और पेशेवर
यूके ने सेवा क्षेत्र में अब तक की अपनी सबसे व्यापक प्रतिबद्धताओं में से एक प्रदान किया है, जिसमें भारत की निर्यात रुचि के सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों और 137 उप-क्षेत्रों को शामिल किया गया है। बेहतर बाजार पहुंच और नियामक सुनिश्चितता भारतीय सेवा प्रदाताओं को आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, इंजीनियरिंग, दूरसंचार और परामर्श सेवाओं में सहायता करेगी।
भारत ने कुशल पेशेवरों के लिए अनुकूल आवागमन प्रावधान सुनिश्चित किए हैं, जिनमें संविदा सेवा प्रदाता, व्यापार यात्री, निवेशक, योग प्रशिक्षक, संगीता‍कार और रसोइये शामिल हैं। इस समझौते में व्यापार आगंतुक, कर्मचारियों का अंतर-कॉर्पोरेट तबादला, संविदा सेवा आपूर्तिकर्ता, स्वतंत्र पेशेवर और निवेशकों के लिए भी पूर्वानुमान योग्य आवागमन उपाय प्रदान किए गए हैं।
इसके अलावा, इस समझौते के तहत 1,800 भारतीय रसोइये, योग प्रशिक्षक और शास्त्रीय संगीतकार हर साल समर्पित आवागमन अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।
नवोन्मेषी एफटीए
पीएम मोदी के नेतृत्व में, एफटीए सिर्फ वस्तुएं और सेवाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्होने नए मानक स्थापित किये हैं। ईएफटीए देशों—स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन—के साथ, भारत ने 100 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल की, जिससे प्रत्यक्ष रोजगार के एक मिलियन अवसरों के सृजन की उम्मीद है। न्यूज़ीलैंड के साथ एफटीए में, देश ने 15 साल में 20 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता हासिल की, जबकि ऑस्ट्रेलियाई एफटीए ने उस दोहरी कर-व्यवस्था की समस्या को सुलझा दिया, जिससे भारतीय आईटी कंपनियां समस्याओं का सामना करती थीं।
यूके के साथ समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू है, दोहरा योगदान सिद्धांत। यह ऐतिहासिक व्यवस्था, जो सीईटीए के साथ प्रभावी होगी, भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को अस्थायी कार्य-उत्तरदायित्व (असाइनमेंट) के दौरान यूके में दोहरी सामाजिक सुरक्षा योगदान देने से मुक्त करती है।
75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक कंपनियों को अस्थायी विदेशी कार्य-उत्तरदायित्व पर कर्मचारियों के लिए लगातार सामाजिक सुरक्षा कवरेज से फायदा मिलने की उम्मीद है।

सरकार की रणनीति
2014 में अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही थी और संभावित निवेशकों का भरोसा टूट रहा था। भारत को उन “कमजोर पांच” अर्थव्यवस्थाओं में से एक माना जाता था, जो नीतिगत भटकाव और भारी भ्रष्टाचार घोटालों से जूझ रही थीं।
मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में वैश्विक विश्वास बहाल करने और इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने के लिए एक सुदृढ़ दृष्टिकोण अपनाया। विकसित देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करना अगला कदम था। एफटीए व्यापार नीतियों के संबंध में अनिश्चितता को कम करके निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाते हैं।
सरकार ने ऐसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ एफटीए किये, जो बड़े बाजार प्रदान करती हैं और भारत के प्रमुख व्यापार हितों के साथ सीधे प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं। इससे दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद स्थिति बनती है, जो पिछली सरकार के उस दृष्टिकोण से अलग है, जिसमें भारतीय व्यवसायों को जोखिम में डालते हुए देश के दरवाजे प्रतिद्वंद्वियों के लिए लापरवाही से खोल दिए गए थे।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, भारत को अब एक मजबूत अर्थव्यवस्था और अस्थिर विश्व में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में व्यापक रूप से सम्मान दिया जाता है। इसने खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है, जिसका एक आकर्षक बाजार है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है। महत्वपूर्ण और व्यापक सुधारों, व्यवसाय करने में आसानी में सुधार, छोटे अपराधों को अपराध मुक्त करने और पीएम के वैश्विक व्यक्तित्व ने भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। आज, दुनिया भारत की विकास कहानी का हिस्सा बनना चाहती है—और एफटीए पर हस्ताक्षर करना चाहती है।
इन व्यापार समझौतों ने घरेलू बाजार को भी धीरे-धीरे खोलना सुनिश्चित किया है। इससे भारतीय बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी होगा और स्थानीय निर्माता उच्च गुणवत्ता वाले सामान प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जो प्रधानमंत्री के विकसित भारत मिशन का एक मुख्य तत्व है।
सीईटीए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच न्यायसंगत और महत्वाकांक्षी व्यापार समझौतों के लिए एक मानक है। यह भारत के मूल हितों से समझौता किए बिना वंचित लोगों के लिए आकर्षक वैश्विक अवसर खोलता है। यह दिखाता है कि नया भारत कैसे व्यापार करता है।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं।)
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