ज्येष्ठ महीने की झुलसती गर्मी में हर किसी को छांव और ठंडे पानी की तलाश रहती है। इसी वक्त सनातन धर्म का सबसे कठिन और खास व्रत “निर्जला एकादशी” मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखते हैं, इसलिए इसे सबसे कठिन एकादशी माना जाता है। बाकी सब एकादशियों के मुकाबले इसे सबसे श्रेष्ठ मानते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि अगर साल भर की एकादशियों का व्रत नहीं रखा, तो भी सिर्फ ये एक निर्जला एकादशी पूरे साल का पुण्य दे देती है, ऐसी धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया यह व्रत विशेष पुण्यफल प्रदान करता है। लेकिन असली पुण्य तब मिलता है, जब आप सही समय पर, सही चीजों का दान भी करते हैं। मानिए या न मानिए, इस बार दान का एक ऐसा खास मुहूर्त आ रहा है, जो आपके लिए सौभाग्य लेकर आ सकता है।
निर्जला एकादशी 2026 पर दान का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि से लेकर द्वादशी के अंत तक कभी भी दान किया जा सकता है, मगर ज्योतिष के हिसाब से 25 जून की शाम 5:30 बजे से सूर्यास्त तक का समय सबसे विलक्षण और फलदायी है। वैसे, आप चाहें तो इन समयों में भी दान कर सकते हैं:
- 25 जून को सुबह 5:25 से 10:30 तक
- 25 जून की शाम 5:30 बजे से सूर्यास्त तक (ये सबसे खास समय है)
- 26 जून, पारणा वाले दिन, सुबह 5:25 से 8:13 तक
निर्जला एकादशी पर किन चीजों का दान करना चाहिए
गर्मी के इस मौसम में राहगीरों और जरूरतमंदों को राहत पहुंचाना ही इस दिन की सबसे बड़ी पूजा है। इस दिन निम्नलिखित चीजों का दान आपके जीवन से सारे कष्टों को हर सकता है:
| दान की वस्तु | धार्मिक व व्यावहारिक महत्व |
| जल से भरा घड़ा | मिट्टी के नए मटके में पानी भरकर दान करने से पितृ दोष शांत होता है। |
| पंखा और छाता | हाथ का पंखा या छाता दान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है। |
| सत्तू, गुड़ और चना | यह न केवल ऊर्जा देता है, बल्कि कुंडली के कई ग्रहों को भी शांत करता है। |
| मौसमी फल | तरबूज, खरबूजा और आम का दान घर में सुख-समृद्धि लाता है। |
| वस्त्र और चप्पल | राहगीरों या जरूरतमंदों को सूती कपड़े और जूते-चप्पल दान करना महापुण्य माना गया है। |
निर्जला एकादशी का पौराणिक महत्व
अब थोड़ा पौराणिक रुख पकड़ते हैं। कहते हैं, महाभारत काल में जब भीम के लिए हर एकादशी का उपवास संभालना मुश्किल हो गया, तो महर्षि वेदव्यास ने उन्हें यही निर्जला एकादशी करने की सलाह दी। तभी से इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
इस बार क्यों खास है निर्जला एकादशी 2026
इतने अच्छे संयोग कई साल बाद बन रहे हैं। ज्योतिष कहते हैं, अगर आप इस दिन प्यासे लोगों को मीठा पानी, शर्बत या प्याऊ लगवाते हैं तो न सिर्फ अक्षय पुण्य मिलेगा, बल्कि आपके वंश में और कारोबार में जो भी अड़चन रही, वह भी खत्म हो जाएगी। तो बस, इस मौके को हाथ से मत जाने दीजिए। पूरे मन से, जितना हो सके उतना दान जरूर करें।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

