Sanitary Pad Top Sheet Health Effects: पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई यानी कि मेंस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर आजकल जागरूकता काफी बढ़ रही है. लेकिन सैनिटरी पैड से जुड़ी एक बहुत जरूरी बात पर अब भी लोग ध्यान नहीं देते और वह है पैड की सबसे ऊपर वाली लेयर (टॉपशीट), जो सीधे महिलाओं के प्राइवेट पार्ट की स्किन को छूती है. डॉक्टरों का कहना है कि पैड कितना खून सोखता है, यह तो जरूरी है ही, लेकिन उसके ऊपर की लेयर की क्वालिटी कैसी है, उसमें से हवा पास होती है या नहीं, यह भी बहुत मायने रखता है. यही चीज महिलाओं को आराम देने, साफ-सफाई बनाए रखने और खुजली या इन्फेक्शन के खतरे को कम करने में मदद करती है.

खराब क्वालिटी के पैड और उनसे होने वाली दिक्कतें

सैनिटरी पैड की ऊपर वाली लेयर को इस तरह बनाया जाता है कि वह खून को तुरंत सोख ले और ऊपर से सूखी रहे. लेकिन अगर पैड बनाने में घटिया क्वालिटी का सामान इस्तेमाल हुआ हो, उसमें से हवा पास न होती हो, या फिर उसमें कड़े केमिकल और खुशबू या परफ्यूम का इस्तेमाल किया गया हो, तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं. इससे खुजली, रैशेज, बेचैनी और लंबे समय तक गीलापन रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं. पैड्स पर हुई कई रिसर्च से यह साफ हो चुका है कि पैड किस चीज से बना है, उसका महिलाओं की स्किन, उनके आराम और पीरियड्स के पूरे अनुभव पर सीधा असर पड़ता है.

गर्म मौसम, पैड से होने वाले रैशेज और सहजन का रोल

खासकर भारत जैसे गरम और पसीने वाले देश में, कई महिलाओं को पैड की रगड़, पसीना जमा होने और हवा न लगने की वजह से ‘पैड रैशेज’ यानी कि स्किन का छिलना या दाने होने की समस्या झेलनी पड़ती है. ऐसी स्थिति में, पैड की ऊपरी परत में मोरिंगा, जिसे हम सहजन या मुनगा भी कहते हैं जैसे प्राकृतिक तत्व का इस्तेमाल एक बेहतरीन ऑप्शन बनकर उभर रहा है. सहजन अपने एंटी-बैक्टीरियल, सूजन कम करने वाले और एंटीऑक्सीडेंट क्वालिटीज के लिए जाना जाता है. इसमें ऐसे कुदरती तत्व होते हैं जो साफ-सफाई बनाए रखते हैं, नाजुक स्किन को आराम देते हैं और पीरियड्स के दौरान आने वाली बदबू को कम करते हैं. नई वैज्ञानिक रिसर्च भी इशारा करती हैं कि सहजन वाली ऊपरी लेयर जलन को कम करती है और बैक्टीरिया या फंगस से होने वाले इन्फेक्शन के खतरे को घटाती है.

बड़े डॉक्टरों की राय और उनकी सलाह

डॉ. अल्पना कंसल अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, गाजियाबाद कहती हैं कि, “महिलाएं अक्सर सैनिटरी पैड खरीदते समय सिर्फ यह देखती हैं कि वह कितना सोखता है. लेकिन जो लेयर लगातार उनकी नाजुक स्किन को छू रही है, वह भी उतनी ही जरूरी है. सॉफ्ट, हवादार और स्किन को सूट करने वाली ऊपरी लेयर वाले पैड बेचैनी को कम करते हैं, रैशेज से बचाते हैं और पीरियड्स को सुरक्षित बनाते हैं. खासकर किशोरियों यानी कि कम उम्र की लड़कियों और सेंसिटिव स्किन वाली महिलाओं के लिए यह बहुत जरूरी है.”

डॉ. ऋषा सिंघल सीनियर कंसल्टेंट, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के अनुसार, “प्राइवेट पार्ट के आस-पास की स्किन बहुत नाज़ुक होती है. अगर वहां लंबे समय तक गीलापन रहे, कड़े केमिकल लगें या हवा न पहुंचे, तो जलन, खुजली और इन्फेक्शन हो सकता है. महिलाओं को ऐसे पैड चुनने चाहिए जो सॉफ्ट हों, हवादार हों और जिन्हें स्किन के डॉक्टरों ने सुरक्षित माना हो. इसके साथ ही, पीरियड्स के दौरान समय-समय पर पैड बदलते रहना भी बहुत जरूरी है.”

सिर्फ खून सोखना काफी नहीं, हवा पास होना भी जरूरी

एक्सपर्ट्स इस बात पर जोर देते हैं कि पीरियड्स की सेहत को सुधारने के लिए पैड के सामान को समझना जरूरी है. सिर्फ अच्छी सोखने की क्षमता ही काफी नहीं है, पैड की ऊपरी लेयर ऐसी होनी चाहिए जो हवा का आना-जाना बनाए रखे, गीलेपन को कम करे और नाजुक स्किन के लिए कोमल रहे. तभी महिलाओं को असली आराम और साफ-सफाई मिल पाएगी.

इसे समाज की आम चर्चा का हिस्सा बनाना जरूरी

डॉ. रमन कुमार चेयरमैन, एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया ने कहा, “पीरियड्स की सेहत से जुड़े मुद्दों को कोई छुपी हुई या शर्म वाली बात मानने के बजाय, इस पर खुलकर आम जन-स्वास्थ्य के मुद्दे की तरह बात होनी चाहिए. महिलाओं और स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई रखने, सुरक्षित प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने और समय पर पैड बदलने के बारे में सही और भरोसेमंद जानकारी मिलनी चाहिए.”

पैड के डिजाइन में नए बदलाव और रिसर्च

सैनिटरी पैड बनाने के तरीकों में लगातार नए बदलाव हो रहे हैं, जिससे महिलाओं को ज्यादा आराम और सुरक्षा मिल सके. साल 2024 में वडोदरा की महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक स्टडी की थी. इसमें पाया गया कि पैड की ऊपरी और सोखने वाली लेयर्स में जो नए तकनीकी सुधार किए गए हैं, वे खून को बेहतर तरीके से संभालने, गीलापन कम करने और पीरियड्स को सुरक्षित बनाने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं.

बदलावों के बारे में लोगों को बताना बहुत जरूरी

डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि पीरियड्स से जुड़े प्रोडक्ट्स में हो रहे इन नए बदलावों के बारे में लोगों को बताना बहुत जरूरी है. खासकर कम उम्र की लड़कियों और युवा महिलाओं को जागरूक करना चाहिए, क्योंकि वे अक्सर घटिया क्वालिटी के पैड लगातार इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसानों को नहीं समझ पातीं. अब जब इस क्षेत्र में नए-नए बदलाव हो रहे हैं, तो महिलाओं के लिए सॉफ्ट, हवादार और नेचुरल सुरक्षा देने वाले पैड चुनना ही सेहत और आराम का सबसे सही रास्ता है.

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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