अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव से सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली। हालांकि, तेल अभी भी हाल के संघर्ष के दौरान बने ऊंचे स्तर से काफी नीचे है, जिससे ग्लोबल मार्केट के लिए राहत बनी हुई है। सोमवार को देशभर में पेट्रोल, डीजल की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया।
कच्चे तेल की कीमतों में हल्की बढ़त
सोमवार को अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) 0.80 फीसदी बढ़कर 70.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.53 फीसदी की बढ़त के साथ 72.52 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। शुक्रवार को WTI की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गई थी, जो 27 फरवरी के बाद पहली बार हुआ था।
पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बदले
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने सोमवार सुबह 6 बजे पेट्रोल, डीजल की कीमतें जारी की, लेकिन इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया।
| शहर | पेट्रोल (rs/लीटर) | डीजल (rs/लीटर) |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 102.12 | 95.20 |
| मुंबई | 111.18 | 97.83 |
| कोलकाता | 113.47 | 99.82 |
| चेन्नई | 107.77 | 99.55 |
| गुरुग्राम | 102.77 | 95.44 |
| नोएडा | 102.12 | 95.56 |
| बेंगलुरु | 110.93 | 98.80 |
| भुवनेश्वर | 109.92 | 100.92 |
| चंडीगढ़ | 98.10 | 86.09 |
| हैदराबाद | 115.69 | 103.82 |
| जयपुर | 112.66 | 97.78 |
| लखनऊ | 102.05 | 95.55 |
| पटना | 113.35 | 99.36 |
| तिरुवनंतपुरम | 115.49 | 104.40 |
भारत के लिए राहत की बात
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल 69 से 70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई हैं। हाल के मिडिल ईस्ट संघर्ष के दौरान बने ऊंचे स्तर की तुलना में यह काफी कम है। उनका कहना है कि क्षेत्र में तनाव बढ़ने से थोड़ी अस्थिरता जरूर आई, लेकिन तेल की कीमतें अब भी नियंत्रण में हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को राहत मिल रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा
अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच प्रस्तावित बातचीत फिलहाल टाल दी गई है। यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट के पास एक व्यावसायिक जहाज पर किए गए हमले के जवाब में की गई। हालांकि, दोनों देशों के बीच मंगलवार को दोहा में बातचीत होने की संभावना जताई गई है।
रूस में हुई तेल की कमी
इस पुरे घटनाक्रम के बीच रूस में तेल की कमी की खबरें सामने आ रहीं हैं। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं। यह कमी यूक्रेन के हाल ही में किए हमले के बाद हुई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि देश में फ्यूल कमी की स्थिति बनी हुई है। इसलिए घरेलू आपूर्ति सुधारने के लिए सरकार डीजल निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।


