दुनिया का सबसे बड़ा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप जल्द ही अपने यूजर्स को यूजरनेम फीचर देने जा रहा है। अब तक यह एप केवल मोबाइल नंबर आधारित पहचान पर काम करता था, लेकिन नए अपडेट के बाद लोग फोन नंबर साझा किए बिना भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। मेटा (Meta) के इस प्लेटफॉर्म ने इस सप्ताह वैश्विक स्तर पर यूजरनेम रिजर्वेशन शुरू किया है और इसका पूरा रोलआउट 2026 के अंत तक होने की उम्मीद है। इस फीचर को प्राइवेसी के लिहाज से बड़ा बदलाव माना जा रहा है, लेकिन भारत जैसे बड़े बाजार में स्कैम, फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर नई चितांए भी सामने आई हैं।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर क्या है?
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर एक वैकल्पिक पहचान लेयर की तरह काम करेगा। इसका मतलब यह है कि यूजर्स अपने मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूजरनेम शेयर कर सकेंगे। किसी पार्टी, कॉन्फ्रेंस, ग्रुप चैट या बिजनेस बातचीत में अब फोन नंबर देने की जरूरत कम हो जाएगी। जब कोई नया व्यक्ति यूजरनेम के जरिए संपर्क करेगा, तब फोन नंबर दिखाई नहीं देगा। हालांकि अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर अब भी जरूरी रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से आपका नंबर सेव है, वे पहले की तरह नंबर से ही संपर्क कर सकेंगे। यूजर कभी भी अपना यूजरनेम बदल या डिलीट कर सकता है। डिलीट करने पर दोबारा फोन नंबर दिखने लगेगा और यूजर को 14 दिन तक पुराना यूजरनेम वापस लेने का मौका मिलेगा।
यूजरनेम की क्या है और यह कैसे काम करेगा?
व्हाट्सएप ने यूजरनेम के साथ यूजरनेम की नामक एक अतिरिक्त सुरक्षा फीचर भी जोड़ा गया है। यह किसी पासवर्ड या फोन पिन जैसा नहीं है, बल्कि एक एक्स्ट्रा परमिशन सिस्टम है। यदि कोई व्यक्ति किसी यूजरनेम के जरिए पहली बार संपर्क करना चाहता है, तो उसे सही यूजरनेम के साथ यह की भी दर्ज करनी पड़ सकती है। इसका उद्देश्य अनचाहे मैसेज और स्पैम को कम करना है। यह फीचर खासतौर पर शिक्षकों, पत्रकारों, डॉक्टरों, फ्रीलांसरों, क्रिएटर्स, दुकानदारों और सार्वजनिक रूप से काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है। ऐसे लोग अपना व्हाट्सएप यूजरनेम सार्वजनिक कर सकते हैं, लेकिन हर अनजान व्यक्ति को सीधे मैसेज भेजने की अनुमति नहीं देना चाहेंगे।
व्हाट्सएप पर यूजरनेम से कैसे होगा संपर्क?
जब यह फीचर पूरी तरह शुरू होगा, तब यूजर्स सीधे किसी का यूजरनेम डालकर चैट शुरू कर सकेंगे। हालांकि इंस्टाग्राम, टेलीग्राम या फेसबुक की तरह यहां सर्च डायरेक्टरी नहीं होगी। यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम टाइप करने पर उससे मिलते-जुलते अकाउंट्स की सूची नहीं दिखाई जाएगी। यहां चैट करने के लिए लोगों को सही और पूरा यूजरनेम पता होना जरूरी होगा। हर यूजरनेम के आगे @ लगाया जाएगा, ताकि उसे डिस्प्ले नेम और मोबाइल नंबर से अलग पहचाना जा सके। केवल नंबर वाले यूजरनेम की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई अनजान व्यक्ति पहली बार संपर्क करता है, तो व्हाट्सएप एक डिटेल कार्ड दिखाएगा। इसमें यह जानकारी होगी कि अकाउंट नया है या पुराना, किस देश से मैसेज आया है और क्या दोनों के बीच कोई कॉमन ग्रुप मौजूद है। इसके बाद यूजर चाहे तो संपर्क सेव कर सकता है, ब्लॉक कर सकता है या रिपोर्ट कर सकता है।
यूजरनेम कैसे बनाया जा सकेगा?
व्हाट्सएप ने अकाउंट सेटिंग्स में यूजरनेम विकल्प देना शुरू कर दिया है। यूजर्स तीन से 35 अक्षरों के बीच यूजरनेम चुन सकेंगे। इसमें लैटिन अक्षर, नंबर, अंडरस्कोर और पीरियड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। पूरी तरह नंबर वाले यूजरनेम या प्रतिबंधित शब्दों की अनुमति नहीं होगी। प्लेटफॉर्म एक ऑटोमैटिक यूजरनेम जनरेटर भी देगा, जो उपलब्ध और यूनिक विकल्प सुझाएगा। मेटा ने यह भी कहा है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर इस्तेमाल होने वाले कुछ यूजरनेम सीमित समय तक रिजर्व रखे जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति वही यूजरनेम व्हाट्सएप पर चाहता है, तो उसे मेटा अकाउंट सेंटर से अकाउंट लिंक करना होगा। हालांकि इससे मेटा अपने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यूजर अनुभव और विज्ञापनों को अधिक पर्सनलाइज कर सकता है।
भारत में यह फीचर क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
भारत में मोबाइल नंबर सिर्फ कॉलिंग का माध्यम नहीं रह गया है। यह बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, स्कूल रिकॉर्ड, जॉब एप्लिकेशन, सोशल ग्रुप और कई ऑनलाइन सेवाओं से जुड़ा होता है। एक बार नंबर सार्वजनिक होने के बाद उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यूजरनेम फीचर महिलाओं, छात्रों, पत्रकारों, फ्रीलांसरों, एक्टिविस्ट्स, दुकानदारों और गिग वर्कर्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उदाहरण के तौर पर कोई होम बेकर इंस्टाग्राम पर अपना मोबाइल नंबर साझा करने के बजाय केवल व्हाट्सएप यूजरनेम दे सकता है। कोई छात्र प्रोजेक्ट ग्रुप में नंबर छिपाकर जुड़ सकता है। पत्रकार अपने स्रोतों से बिना निजी नंबर बताए बातचीत शुरू कर सकते हैं। वहीं दुकानदार बिजनेस पूछताछ और निजी संपर्कों को अलग-अलग रख सकेंगे। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी पहचान और स्कैम रोकने के लिए यूजर्स को सावधानी बरतनी होगी और किसी अनजान अकाउंट पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

