वायनाड: केरल के वायनाड में जंगली हाथियों का दिखना आमतौर पर लोगों के लिए डर, घबराहट और नुकसान की खबर लेकर आता है। अक्सर फसलें बर्बाद होती हैं, घरों को नुकसान पहुंचता है और इंसान-हाथी संघर्ष में दोनों तरफ जानें जाती हैं। लेकिन इसी वायनाड में एक ऐसी हथिनी थी, जिसने इंसानों के दिलों में डर नहीं, बल्कि प्यार और अपनापन पैदा किया। इस हथिनी का नाम लक्ष्मी था। पुलपल्ली के चेकाडी के पास स्थित चंद्रोथ उन्नति आदिवासी बस्ती के लोगों के लिए लक्ष्मी सिर्फ एक जंगली हथिनी नहीं थी। वो उनके परिवार का हिस्सा बन चुकी थी।

पूरे गांव में गम का माहौल

करीब 70 साल की इस मादा हाथी की मौत ने पूरे गांव को गम में डुबो दिया है। बुधवार सुबह वन विभाग के अधिकारियों को लक्ष्मी का शव जंगल में मिला। यहां वही इलाका था जहां लक्ष्मी अक्सर शांति से घूमती थी। गांव वालों के मुताबिक, लक्ष्मी कई सालों से जंगल से निकलकर बस्ती के पास आ जाती थी और घंटों वहीं शांत बैठी रहती थी। उसने कभी किसी इंसान पर हमला नहीं किया, न ही खेतों को नुकसान पहुंचाया। धीरे-धीरे लोगों का डर खत्म हो गया और उसके साथ एक गहरा रिश्ता बन गया।

लक्ष्मी की एक झलक पाने का इंतजार करते थे गांव वाले

बस्ती के बच्चे रोज उसकी एक झलक पाने का इंतजार करते थे। महिलाएं और बुजुर्ग उसके लिए कटहल, आम और दूसरे फल इकट्ठा करके रखते थे। लक्ष्मी भी मानो उस प्यार को समझती थी और बिना किसी आक्रामकता के गांव के बीच आती-जाती थी। यह रिश्ता इंसान और वन्यजीव के बीच दुर्लभ भरोसे की मिसाल बन गया था। अब लक्ष्मी के जाने के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। कई ग्रामीणों की आंखें नम हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक हाथी की मौत नहीं, बल्कि अपने एक प्रिय साथी को खोने जैसा दर्द है। वन विभाग पोस्टमार्टम के जरिए मौत की वजह जानने की कोशिश कर रहा है, लेकिन गांव वालों का कहना है कि लक्ष्मी अब लौटकर नहीं आएगी। लेकिन उसकी यादें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगी।

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