नई दिल्ली: कई बार सड़क हादसों में घायल लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि समय पर बचाव का काम शुरू नहीं किया जाता. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए गुजरात की कंपनी डीएचआई मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने इंटरसेप्टर वाली एक खास स्मार्ट रेस्क्यू गाड़ी बनाई है. इस गाड़ी को इंटरनेशनल पुलिस एक्सपो में दिखाया गया. जहां इसे एक्सपो की खास बात भी बताया गया. कंपनी का कहना है कि इस गाड़ी का मकसद किसी हादसे के बाद गोल्डन आवर में तुरंत बचाव का काम शुरू करके लोगों की जान बचाना है.

एक वाहन में 50 से ज्यादा रेस्क्यू उपकरण
कंपनी के निदेशक प्रवीण नरुका के मुताबिक इस स्मार्ट रेस्क्यू व्हीकल में 50 से ज्यादा आधुनिक रेस्क्यू उपकरण लगाए गए हैं. इनमें हाइड्रोलिक कटर, स्प्रेडर, बैटरी से चलने वाले रेस्क्यू टूल्स, विंच मशीन, फर्स्ट एड किट, फोल्डिंग स्ट्रेचर, फोल्डिंग लैडर, फायर एक्सटिंग्विशर, जनरेटर, एक्सटेंशन केबल, एक्स, हथौड़ा और कई अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं. इन सभी टूल्स को इस तरह लगाया गया है कि जरूरत पड़ते ही तुरंत इस्तेमाल किया जा सके.

एक्सीडेंट में फंसे लोगों को जल्दी बचाने में मदद मिलेगी
आजकल ज़्यादातर गाड़ियों में सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम होता है. इसलिए, गंभीर एक्सीडेंट के दौरान, लोग अक्सर गाड़ी के अंदर फंस जाते हैं. ऐसे में, रेस्क्यू टीम को उन्हें निकालने के लिए गाड़ी की बॉडी को काटना पड़ता है. इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, इस गाड़ी में एक कटर-कम-स्प्रेडर लगाया गया है जो 32 mm तक मोटे स्टील को काट सकता है. इससे एक्सीडेंट के बाद घायल व्यक्ति तक जल्दी पहुंचना और उसे हॉस्पिटल पहुंचाना आसान हो जाएगा.

रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ-साथ ट्रैफिक नियमों पर भी नजर 
इस गाड़ी की एक और खासियत यह है कि जब यह रेस्क्यू ऑपरेशन में नहीं लगी होगी, तो यह इंटरसेप्टर गाड़ी का भी काम कर सकती है. इसमें एक मॉडर्न बिना ड्राइवर वाला कैमरा लगा है जो हाईवे पर ट्रैफिक नियम तोड़ने वाली गाड़ियों की पहचान करेगा. कैमरा सीधे सिस्टम से कनेक्ट होगा, और नियम तोड़ने वालों का चालान अपने आप कट जाएगा. इससे पुलिस वालों को लगातार मौके पर मौजूद रहने की ज़रूरत भी कम हो जाएगी.

पुलिस और एक्सपर्ट्स की राय पर आधारित डिजाइन
कंपनी के मुताबिक, इस स्मार्ट रेस्क्यू गाड़ी को बनाने में लगभग छह महीने लगे. इसे बनाने से पहले, राज्य पुलिस, सेंट्रल पुलिस फोर्स और दूसरे एक्सपर्ट्स से सलाह ली गई ताकि यह पक्का हो सके कि गाड़ी में ऐसे इक्विपमेंट हैं जिनकी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सच में ज़रूरत होगी. कंपनी का कहना है कि मकसद सिर्फ़ एक गाड़ी बनाना नहीं था, बल्कि एक ऐसा सॉल्यूशन बनाना था जो जानें बचाने में मदद करे.

गोल्डन ऑवर में जान बचाने पर फोकस
कंपनी का मानना ​​है कि एक्सीडेंट के बाद पहला घंटा, यानी गोल्डन आवर, सबसे ज़रूरी होता है. अगर रेस्क्यू ऑपरेशन तुरंत शुरू किया जाए, सही इक्विपमेंट दिए जाएं, और घायल व्यक्ति तक तुरंत पहुंचा जाए, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं. यही सोच इस स्मार्ट रेस्क्यू गाड़ी की सबसे बड़ी ताकत है, जो भविष्य में भारत के हाईवे रेस्क्यू सिस्टम को और मजबूत कर सकती है.

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