केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन संस्थानों के लिए ‘एमनेस्टी स्कीम, 2026’ (माफ़ी योजना) की शुरुआत की है, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट चला रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे संस्थानों को अपनी स्थिति को कानूनी रूप से नियमित (regularize) करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करना है। वित्त अधिनियम, 2026 के माध्यम से अब मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड के आयकर ढांचे को ‘एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952’ के कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप बना दिया गया है।

इस नई व्यवस्था के तहत, आयकर अधिनियम के अंतर्गत मान्यता केवल उन्हीं ट्रस्टों को दी जाएगी, जिन्हें भविष्य निधि अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत औपचारिक छूट (exemption) प्राप्त है। ऐसे संस्थानों को अधिनियम की धारा 17 और ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020’ की धारा 143 के तहत पिछली तारीख से (retrospectively) एमनेस्टी प्रदान की जाएगी। यह योजना उन संस्थानों पर प्रभावी होगी जिनके पास संबंधित केंद्र या राज्य सरकार से छूट का औपचारिक नोटिफिकेशन नहीं है। 29 जून, 2026 को जारी अधिसूचना के बाद से यह योजना अगले छह (6) महीनों के लिए खुली रहेगी।

योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-I में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराना चाहते हैं और जिन्होंने बिना छूट वाले संस्थान (un-exempted) के रूप में नियमों का पालन शुरू कर दिया है या भविष्य में ऐसा करने का विकल्प चुन रहे हैं। वहीं श्रेणी-II में वे संस्थान आते हैं जो ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराने के साथ-साथ ‘कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020’ के तहत एक छूट प्राप्त संस्थान (exempted establishment) के तौर पर अपनी गतिविधियों को आगे भी जारी रखना चाहते हैं।

इस योजना के तहत नियोक्ताओं को कई प्रमुख राहतें और लाभ दिए जा रहे हैं। इसके तहत ट्रस्ट की स्थापना से लेकर एक निश्चित कट-ऑफ तारीख तक छूट की स्थिति और मान्यता को पिछली तारीख से नियमित किया जाएगा। इसके अलावा, सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या और कॉर्पस के आकार से जुड़े नियमों में ढील दी गई है, तथा 3 साल पहले के नियमों के अनुपालन की शर्त को भी पूरा माना जाएगा। सबसे बड़ी राहत के रूप में, बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए चल रही सभी कानूनी व असेसमेंट कार्यवाहियां वापस ले ली जाएंगी, बशर्ते सदस्यों के खातों में कानूनी दरों के समान या उससे बेहतर ब्याज और योगदान जमा किया गया हो।
योजना का लाभ उठाने के लिए नियोक्ताओं को कुछ अनिवार्य जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा। योग्य संस्थानों को केंद्र सरकार को संबोधित एक औपचारिक आवेदन संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। इसके साथ ही, इस योजना से जुड़ने की इच्छा जताते हुए एक ‘एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट’ (EoI) ईमेल आईडी rc.exemption@epfindia.gov.in पर भी भेजा जा सकता है। नियोक्ताओं के लिए अपने वित्तीय खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से कराना अनिवार्य होगा और भविष्य निधि कार्यालय के अधिकारियों के निर्देशानुसार विशेष या अनुपालन ऑडिट को आवेदन के 3 महीने के भीतर पूरा करना होगा।

विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के लिए हितधारक 29 जून, 2026 की राजपत्र अधिसूचना GSR 525(E) के तहत जारी ‘कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026’ के अनुबंध (Annexure) के भाग C को देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ईपीएफओ (EPFO) की आधिकारिक वेबसाइट पर परिपत्र और एसओपी (SoP) भी उपलब्ध हैं। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री जयवदन इंगले ने सभी संबंधित ट्रस्टों और नियोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे इस सीमित अवधि की योजना का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन करें और अपनी कानूनी स्थिति को सुदृढ़ करें।

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