समस्तीपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग छोटी-मोटी बीमारियों और घाव के इलाज के लिए पारंपरिक घरेलू नुस्खों पर काफी भरोसा करते हैं. आधुनिक चिकित्सा के इस दौर में भी गांवों के बुजुर्ग पुराने देसी उपचार को बेहद कारगर मानते हैं. इन्हीं पारंपरिक तरीकों में एक नाम कोचिला का आता है. इसे लोग घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, कोचिला को आग में अच्छी तरह पकाकर और नारियल तेल में मिलाकर घाव पर लगाने से पुराने जख्म भी ठीक हो जाते हैं.
ग्रामीण इस पौधे को बेचने के बजाय अपने इस्तेमाल के लिए संभाल कर रखते हैं. कुछ लोग कुत्ता काटने पर भी इसके बीजों को पानी में भिगोकर पीने जैसी पुरानी परंपराओं का दावा करते हैं. हालांकि प्राकृतिक उपचारों को सुरक्षित मानने के साथ ही ग्रामीण खुद भी यह स्वीकार करते हैं कि गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है. वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा कुत्ता काटने या किसी गंभीर बीमारी में तुरंत अस्पताल जाकर उचित चिकित्सकीय इलाज कराने की सख्त सलाह देते हैं.
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

