देश को दहलाने की एक और नापाक साजिश का गुजरात एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने भंडाफोड़ किया है। प्रतिबंधित पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बढ़ते जाल पर कड़ा प्रहार करते हुए एटीएस ने पाटण जिले के सिद्धपुर तालुका से पांच और संदिग्ध आतंकियों को धर दबोचा है। ये गिरफ्तारियां खाड़ियाल गांव से हुई हैं। पकड़े गए आरोपियों की पहचान बिलाल आबिदभाई शेरा, मोहम्मद अयूब कादीवाला उर्फ मोहम्मद खड़ियासन, मोहम्मद पालनपुरी उर्फ खली अयूब सुनसरा, शफिया रईस मुख्ती उर्फ शफी चापी और मोहम्मद हसन कार्डिया उर्फ हसन हैदरपुरी के रूप में हुई है।

अदालत ने इन पांचों आरोपियों को 24 जुलाई तक एटीएस की हिरासत (रिमांड) में भेज दिया है। सरकारी वकील पी.आर. दंतानी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इन संदिग्धों में से एक आरोपी टाइम बम बनाने की कोशिश कर रहा था। इतना ही नहीं, इन्होंने एक कच्चे टाइम बम का परीक्षण भी किया था, हालांकि उनका वह प्रयोग असफल रहा।

13 तक पहुंची गिरफ्तार आतंकियों की संख्या

इस मॉड्यूल का पर्दाफाश तब शुरू हुआ था जब एटीएस ने बीते 3 जुलाई को गुजरात और मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से जैश के 8 सक्रिय सदस्यों (अहमद, इब्राहिम, मुदस्सिर, जकारिया दुरानी, मुफ्ती फौजान, मोहम्मद अमीन शेरा, मोहम्मद अब्दुल और बिलाल मोहम्मद) को गिरफ्तार किया था। ताजा गिरफ्तारियों के साथ अब इस खतरनाक टेरर नेटवर्क के पकड़े गए सदस्यों की कुल संख्या 13 हो गई है। जांच में सामने आया है कि पहले गिरफ्तार हो चुके अमीन नाम के आरोपी ने ही इन नए संदिग्धों को जैश का जिहादी साहित्य और सामग्री सप्लाई की थी। इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है।

आतंकवाद के खिलाफ गुजरात एटीएस का कड़ा रुख

यह पहली बार नहीं है जब गुजरात एटीएस ने देश विरोधी ताकतों के खिलाफ इतनी मुस्तैदी दिखाई है। हाल के वर्षों में गुजरात का तटीय और सीमावर्ती इलाका आतंकियों और ड्रग तस्करों के निशाने पर रहा है।

आईएसआईएस (ISIS) मॉड्यूल का खात्मा: पिछले साल ही गुजरात एटीएस ने पोरबंदर और सूरत से आईएसआईएस के मॉड्यूल से जुड़े कई आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे।

सरहद पार से फंडिंग और हथियारों की खेप: खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठा जैश और लश्कर-ए-तैयबा का नेतृत्व अब स्थानीय युवाओं को सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए रेडिकलाइज (कट्टरपंथी) कर रहा है। ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार और हेरोइन भेजना और उससे मिलने वाले पैसे को टेरर फंडिंग में इस्तेमाल करना इनका नया पैंतरा बन चुका है।

फिलहाल एटीएस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन संदिग्धों को टाइम बम बनाने का सामान कहां से मिल रहा था, इसे कहां छुपाया गया है और उर्दू में छपी जैश की जिहादी किताबें इनके पास कैसे पहुंचीं। सुरक्षा एजेंसियों की इस त्वरित कार्रवाई से राज्य में एक संभावित बड़े आतंकी हमले को समय रहते टाल दिया गया है।

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