भरने की अंतिम तिथि अब नजदीक आने लगी है। इसलिए आखिरी समय की तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए समय रहते रिटर्न भरना बेहतर रहेगा। जल्दबाजी में आईटीआर भरने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की आईटीआर भरने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ऑनलाइन फॉर्म के लिए एक्सेल यूटिलिटी जारी की हुई हैं। एक्सेल यूटिलिटी उपलब्ध होने का मतलब है कि आप डिटेल्स भरने और फाइल को डिजिटल रूप से अपलोड करने से पहले अपना रिटर्न ऑफलाइन तैयार कर सकते हैं। अगर आप आईटीआर फाइल करने जा रहे हैं, तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें:
ITR किसे भरना चाहिए?
वैसे तो हर भारतीय निवासियों को आईटीआर भरना चाहिए। लेकिन जिनकी इनकम तय सीमा से ज्यादा है, विदेश में संपत्ति है, शेयर मार्केट में निवेश करते हैं, सभी बैंक डिपॉजिट्स 50 लाख से ज्यादा है, सालाना 1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल भरा है तो आपको आईटीआर जरूर फाइल करनी चाहिए।
कौनसा फॉर्म किसे चुनना चाहिए?
ITR-1 फॉर्म उसके लिए है जिसकी आय सैलरी और एक घर की रेंटल इनकम से होती है।
ITR-2 फॉर्म ऐसे हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए है, जिसकी आय बिजनेस से नहीं होती।
ITR-3 फॉर्म उस HUF के लिए है जिसकी आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है।
ITR-4 फॉर्म छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, प्रोफेशनल्स और प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम के तहत टैक्स भरने वाले लोगों के लिए है।
ITR भरने की आखिरी तारीख क्या है?
अलग-अलग फॉर्म चुनने वालों के लिए आईटीआर भरने की लास्ट डेट अलग होती है। ITR-1 और ITR-2 भरने वालों के लिए 31 जुलाई, ITR-3 और ITR-4 भरने वालों के लिए 31 अगस्त आखिरी तारीख है। इसके अलावा आप 31 दिसंबर 2026 तक भी आईटीआर भर सकते हैं, लेकिन इसमें देरी की अवधि और आपकी टैक्सेबल रकम के आधार पर 1,000 से 10,000 रुपये तक की लेट फीस देनी पड़ सकती है।
दस्तावेज पहले रखें तैयार
रिटर्न भरने से पहले जरूरी दस्तावेज तैयार रखना बेहतर रहेगा। इनमें पैन कार्ड, आधार कार्ड, निवेश के प्रमाण, होम लोन ब्याज प्रमाणपत्र और बीमा प्रीमियम की रसीदें शामिल हैं। यदि नौकरी बदली है तो पुराने और नए दोनों एम्प्लॉयर का फॉर्म-16 भी रखना चाहिए।
फॉर्म-16 और 26AS का बारे में जानें
फॉर्म-16 में वेतन, टीडीएस और कर छूट की जानकारी होती है, जबकि फॉर्म-26AS या एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में ब्याज से होने वाली इनकम, डिविडेंड, सिक्योरिटीज के ट्रांजैक्शन और विदेश से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) जैसी जानकारी शामिल होती है, जो आपके ITR फॉर्म में पहले से भरी होती है।
E-Verification करना न भूलें
रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिन के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन करना जरूरी है। यह आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) से किया जा सकता है।

