Share Market News : भारतीय शेयर बाजार में आज हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को गिरावट देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में 9 बजकर 30 मिनट पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 0.81 फीसदी या 631 अंक की गिरावट के साथ 77,520 पर ट्रेड करता दिखा। उधर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी 0.64 या 154 अंक गिरकर 24,183 पर आ गया। इस समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 15 शेयर हरे निशान पर और 15 शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहे थे। सबसे अधिक गिरावट प्राइवेट बैंकों और फाइनेंशियल शेयरों में देखने को मिली।
प्राइवेट बैंकों के शेयर सबसे अधिक टूटे
सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो सबसे अधिक गिरावट निफ्टी प्राइवेट बैंक में 2.65 फीसदी देखी जा रही है। इसके अलावा, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेस 25/50 में 1.35 फीसदी, निफ्टी ऑटो में 0.59 फीसदी, निफ्टी रियल्टी में 0.85 फीसदी और निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.27 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। इससे इतर निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.19 फीसदी, निफ्टी फार्मा में 0.74 फीसदी, निफ्टी हेल्थकेयर में 0.63 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 0.98 फीसदी, निफ्टी आईटी में 0.05 फीसदी और निफ्टी मेटल में 0.61 फीसदी की तेजी देखने को मिली।
क्यों आई बाजार में गिरावट
ईरान-अमेरिका संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
वीकेंड में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात भी ईरान पर हमले किए। वहीं, कुवैत और बहरीन ने भी ईरानी हमलों की जानकारी दी। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि हॉर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकर विस्फोट का शिकार हो गए और बीच रास्ते में फंस गए। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने इन जहाजों को इसी रास्ते से गुजरने के लिए प्रोत्साहित किया था।
कच्चा तेल 90 डॉलर के पार, सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंता
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल पर देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 90.19 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह इसमें करीब 16 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जो कई महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त रही। अमेरिकी WTI क्रूड भी 84 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में वहां पैदा हुए संकट ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली
सिर्फ भारत ही नहीं, एशियाई बाजारों में भी सोमवार सुबह भारी दबाव देखने को मिला। जापान का निक्की और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 फीसदी से ज्यादा टूट गए। ताइवान का शेयर बाजार भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा। अमेरिका में भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोर माहौल रहा था। एसएंडपी 500 और नैस्डैक में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी, जबकि डाउ जोंस भी करीब 0.8 फीसदी फिसल गया था। पूरे सप्ताह के हिसाब से भी तीनों प्रमुख अमेरिकी सूचकांक नुकसान में रहे।
बैंकिंग शेयरों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
घरेलू बाजार में सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग सेक्टर से आया। जून तिमाही के नतीजे निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए, जिसके बाद बड़े निजी बैंकों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर करीब 5 फीसदी तक टूट गए। वहीं, कोटक महिंद्रा बैंक में भी 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इन बैंकों ने शनिवार को अपने अप्रैल-जून तिमाही के नतीजे जारी किए थे और सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों की निराशा शेयरों में साफ दिखाई दी।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना
बाजार पर एक और दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का रहा। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.551 फीसदी पर पहुंच गई। 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.073 फीसदी और 2 साल की यील्ड 4.183 फीसदी रही। आमतौर पर जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशकों का रुझान शेयर बाजार की जगह बॉन्ड की ओर बढ़ जाता है। यही वजह है कि इक्विटी बाजारों में दबाव देखने को मिलता है।
रुपये में कमजोरी
विदेशी निवेशकों की सतर्कता और महंगे कच्चे तेल का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखा। सोमवार के शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 96.41 पर पहुंच गया। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और विदेशी निवेशकों की सतर्क रणनीति फिलहाल रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की चाल, वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगी।

