नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया से जन्मे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के अनशन-प्रदर्शन ने सोमवार को अराजक रूप ले लिया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने समय रहते उग्र होती भीड़ को नियंत्रित कर हालात संभाल लिए।
इस बीच सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों की कथित बर्बरता से जुड़े कई भ्रामक और अफवाहपूर्ण पोस्ट भी तेजी से वायरल होते रहे, जो पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए। राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से निपटने के साथ-साथ पुलिस को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का जवाब देने में भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
दिनभर बदलता रहा आंदोलन का स्वरूप
नीट परीक्षा 2026 के पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ सीजेपी का आंदोलन समय के साथ राजनीतिक रंग लेने लगा। शुरुआत में इसे छात्रों का आंदोलन बताया गया, लेकिन धीरे-धीरे विभिन्न राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों की इसमें सक्रिय भागीदारी बढ़ती गई। इसी दौरान जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर पर चल रहा अनशन उनकी बिगड़ती सेहत पर भारी पड़ने लगा।
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस लगातार आंदोलन के बदलते स्वरूप पर नजर बनाए हुए थीं। 18 जुलाई की सुबह पुलिस ने पूर्व नियोजित योजना के तहत सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
सोशल मीडिया पर बढ़ी बयानबाजी
इस कार्रवाई की राजनीतिक दलों और आंदोलन से जुड़े नेताओं ने तीखी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर आंदोलन को कमजोर करने के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति का हवाला दिया और सरकार की कार्रवाई को उचित माना।
उधर, जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज होती गई। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए।
संसद की ओर बढ़ती भीड़ पर करना पड़ा बल प्रयोग
देखते ही देखते नारेबाजी तेज हो गई और भीड़ उग्र होने लगी। शुरुआत में पुलिस ने बल प्रयोग से बचते हुए प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन दोपहर तक हालात लगातार बिगड़ते गए।
इस दौरान पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की घटनाएं भी सामने आईं। संसद परिसर और वहां मौजूद सांसदों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस को आखिरकार सख्ती करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, पानी की तेज बौछार और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।
सड़क शांत हुई तो सोशल मीडिया बना नई चुनौती
पुलिस कार्रवाई के बाद भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते उन्हें खदेड़ दिया और संसद परिसर के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, छिटपुट हिंसा की खबरें अब भी सामने आ रही हैं, जिन पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।
केंद्र सरकार की ओर से भी बातचीत का माहौल बनाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। उमस भरी गर्मी के बीच सड़क पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को दिनभर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

