रायपुर। कुपोषण के दानव को हराने और जन-जन को जागरूक करने के लिए दू पईडील सुपोषण बर के नाम से अभिनव पहल की गई है। बस्तर जिले में विभिन्न स्तरों पर संचालित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों को जोड़ते हुए जिले में कुपोषण के स्तर में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत जिले के रमणीय स्थानों में सायकल रैली के आयोजन के साथ ही एंडवेंचर स्पोर्टस के तहत् रॉक क्लाईबिंग, वॉटर वेप्लिंग, घने जंगलों के बीच ऑफरोडिंग, ट्रैकिंग, कैम्पींग के साथ बोनफायर का भी आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान आदिवासी संस्कृति, स्थानीय व्यंजन का प्रदर्शन किया जाएगा। जिसका आंगतुक और सायकलिस्ट लुफ्त उठा सकेंगे। दू पईडील सुपोषण बर कार्यक्रम में प्रदेश एवं देश-विदेश से कई सायकल सवार सम्मिलित होगें। इस अभियान का उद्देश्य जिले को कुपोषण से शत-प्रतिशत मुक्त कराने के लिए कुपोषण अभियान को जनआंदोलन में बदलना है। अभियान के तहत 10 जनवरी से शुरू हुए विभिन्न आयोजन 17 जनवरी तक चलेंगे। सप्ताह भर चलने वाले इस कार्यक्रम को सभी वर्गों का व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। यह कार्यक्रम युवोदय के स्वयं सेवक, मितानिन, आंगनबाडी कार्यकर्ता, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। अभियान के अंतिम दिन 17 जनवरी को कुपोषित बच्चों के अभिभावक समेत ग्रामवासियों द्वारा भी अपने-अपने ग्राम में सायकल चालन का कार्य किया जाएगा तथा ग्राम स्तरीय खेल प्रतियोगिता का आयोजन होगा। कलेक्टर रजत बंसल के मार्गदर्शन में कोलेंग से लेकर ककनार तक चल रहे कार्यक्रम की तस्वीरें कुपोषण को हराने का सपना संजोने वालों के मन में उत्साह भर रही हैं। कार्यक्रम के तहत स्वैच्छिक अनुदान को बढ़ावा देते हुए कुपोषित बच्चों को चिन्हांकित कर पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से भी लाभान्वित किया जाएगा। सायकल रैली 17 जनवरी को सुबह 6 बजे से प्रारंभ होगी जो चित्रकोट से मेंद्री घुमर-तामड़ा घुमर होते हुए मिचनार तक 45 किमी. तक की दूरी तय करेगी। बच्चों और बिगिनर सायकलिस्ट के लिए चित्रकोट से मेंद्री घुमर-तामड़ा घुमर 20 किमी. की दूरी रखी गई है। प्रोफेशनल सायकलिस्टो के लिए चित्रकोट, मेंद्री घुमर-तामड़ा घुमर मिचनार होते हुए ऑफरोडिंग सायकलिंग का भी आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत कुपोषण से मुक्ति में जन भागीदारी हेतु जिले के समस्त लोगों से स्वैच्छिक दान करने का आग्रह किया गया है। कार्यक्रम का मूल भाव अभिभावकों के मध्य कुपोषण से हानि और सुपोषण से होने वाले लाभ का संदेश पहुंचाना है तथा उनमें जागरूकता उत्पन्न करना है। इसमें कुपोषित बच्चों के अभिभावकों द्वारा शपथ ग्रहण किया जायेगा कि वे अपने बच्चों को सुपोषित करने हेतु आवश्यक सभी कदम उठायेंगे तथा निश्चित अवधि में अपने बच्चों को सुपोषित करेंगे। इसमें प्रमुख रूप से बच्चों को पोषण पुर्नवास केन्द्र में भर्ती कराना उनके खान-पान में परिवर्तन लाया जाना आदि सम्मिलित है। सुपोषण के इस अभियान को गति देने के लिए जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और मितानिनें अभिभावकों से भेंट कर उन्हें उनके बच्चों से कुपोषण से मुक्ति के संदर्भ में उचित परामर्श देने के साथ जनसहभागिता बढ़ा रही हैं।

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