अहमदाबाद: 13 साल गुजरात के मुख्यमंत्री और अब पिछले 12 साल से प्रधानमंत्री के बड़े दायित्व को संभाल रहे नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों के कामकाज पर खुद नजर रखते हैं। वे अभी तक के सफर में परफॉरमेंस को मेन क्राइटेरिया मानते हैं। ऐसा बेहद कम हुआ है कि कि विपक्ष या फिर आंदोलन के चलते उन्होंने मंत्रियों से इस्तीफा लिया हो। हालांकि 25 साल की बड़ी यात्रा कुछ मौके ऐसे जरूर हुए जब मंत्रियों को पद छोड़ने पड़े। धर्मेंद्र प्रधान के मामले में सरकार ने अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि उनको पद छोड़ना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री काल में:

  1. माया कोडनानी (मार्च 2009):गुजरात सरकार में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री माया कोडनानी को 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। सालों बाद माया कोडनानी भी बरी हुईं।
  2. अमित शाह (जुलाई 2010):गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सीबीआई द्वारा आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किए जाने और गिरफ्तारी की तलवार लटकने के बाद इस्तीफा देना पड़ा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी ने खुद दिल्ली में उनके इस्तीफे की घोषणा की थी। हालांकि बाद में सालों में अमित शाह को इस मामले में क्लीन चिट मिली। वह कोर्ट के फैसले के बाद सबसे पहले सोमनाथ दर्शन को गए थे।

2. प्रधानमंत्री काल में इस्तीफे:
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में सीधे तौर पर विपक्षी जन-आंदोलनों के दबाव में आकर किसी मंत्री के इस्तीफे का चलन बेहद कम रहा है। हालांकि, नीतिगत विवादों, चुनावों और प्रदर्शन के आकलन से जुड़े फेरबदल के समय कई बड़े इस्तीफे हुए हैं।

  1. एम जे अकबर (अक्टूबर 2018):देश में चले ‘मीटू’ आंदोलन के दौरान तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर पर कई महिला पत्रकारों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इस भारी सामाजिक और राजनीतिक विवाद के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
  2. हरसिमरत कौर बादल (सितंबर 2020):शिरोमणि अकाली दल की नेता और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने तीन कृषि कानूनों के विवाद के विरोध में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा नीतिगत मतभेदों और किसान आंदोलन के दबाव के कारण हुआ था।
  3. डॉ. हर्षवर्धन (जुलाई 2021):कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले मोदी सरकार ने 12 मंत्रियों से एक साथ इस्तीफे लिए थे। इसे प्रशासनिक विफलता और विवादों से जोड़कर देखा गया। इसमें डॉ. हर्षवर्धन (तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री) के इस्तीफे को देशव्यापी आलोचना एक वजह माना गया था।
  4. रविशंकर प्रसाद (तत्कालीन आईटी और कानून मंत्री): सोशल मीडिया कंपनियों (विशेषकर ट्विटर) के साथ सरकार के बढ़ते विवादों और नए आईटी नियमों को लेकर पैदा हुए गतिरोध के बीच पद से हटाया गया।
  5. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’: तत्कालीन शिक्षा मंत्री जिन्हें नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कारणों के विवाद के बीच हटाया गया था।
  6. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में कितने इस्तीफे
  7. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (2004-2014) के कार्यकाल के दौरान कई मंत्रियों ने भ्रष्टाचार, घोटालों और राजनीतिक मतभेदों के कारण विवादों में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इससे सरकार छवि काफी खराब हो गई थी।
  8. रेल मंत्री पवन कुमार बंसल (2013): रेल मंडल बोर्ड में अधिकारियों की नियुक्ति के लिए रिश्वत लेने के आरोप (रेलवे घूसकांड) में उनके एक रिश्तेदार के पकड़े जाने के बाद।
  9. कानून मंत्री अश्विनी कुमार (2013): कोयला ब्लॉक आवंटन (Coal Scam) से जुड़ी सीबीआई की जांच रिपोर्ट को कथित तौर पर प्रभावित करने और सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद।
  10. संचार मंत्री ए. राजा (2010): 2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में नाम आने के बाद पद छोड़ा।
  11. विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर (2010): आईपीएस की कोच्चि फ्रेंचाइजी की बोली में वित्तीय अनियमितताओं और विवादों को लेकर विवाद फिर इस्तीफा।
  12. कोयला मंत्री शिबू सोरेन (2006): हत्या के एक पुराने मामले (शशिनाथ झा हत्याकांड) में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद इस्तीफा।
  13. टीएमसी मंत्रियों का सामूहिक इस्तीफा (2012): तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने के विरोध में टीएमसी के 6 मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया था। इनमें मुकुल रॉय भी थे।
  14. 2011 में एक व्यापक कैबिनेट फेरबदल के दौरान डीएमके के तत्कालीन कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन ने 2G स्पेक्ट्रम से जुड़े नए आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया था।
  15. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की कितनी गुंजाइश
  16. कॉकरोच जनता पार्टी और कांग्रेस भले ही शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक नरम हैं। धर्मेंद्र प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन सात मंत्रियों में हैं, जो उनके 2014 से उनके साथ हैं। इससे धर्मेंद्र प्रधान की अहमियत समझी जा सकती है। इतना ही बीजेपी के मजबूत नेता भी हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की मजबूत पृष्ठभूमि रखते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के हालांकि एक दिलचस्प तथ्य यह जुड़ गया है कि वह भाजयुमो नेता के तौर पर पहली बार तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने ओडिशा के भुवनेश्वर में पेपर लीक के मुद्दे पर एक प्रोटेस्ट की अगुवाई की थी। धर्मेंद्र प्रधान जुलाई में केंद्रीय मंत्री बने थे। जुलाई महीने में ही उनके इस्तीफे को लेकर बवाल मचा हुआ है।
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930  
Exit mobile version