Intresting Fact : हम सभी ने बचपन से आसमान को नीले रंग का देखा है. साफ मौसम में ऊपर नजर डालें तो पूरा आकाश नीली चादर ओढ़े दिखाई देता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष यात्रियों की तस्वीरों में यही आसमान पूरी तरह काला क्यों नजर आता है? आखिर ऐसा क्या है कि धरती से देखने पर आसमान नीला और अंतरिक्ष से काला दिखाई देता है? इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि विज्ञान का एक बेहद रोचक सिद्धांत काम करता है.
असल में, अंतरिक्ष का अपना कोई रंग नहीं होता. आसमान का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वातावरण से कैसे गुजरता है. सूर्य की रोशनी देखने में भले ही सफेद लगती हो, लेकिन उसमें इंद्रधनुष के सातों रंग शामिल होते हैं.
छिपा है विज्ञान का बेहद दिलचस्प राज
जब सूर्य की किरणें पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो वे हवा के अणुओं, धूल के कणों और गैसों से टकराती हैं. इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में रेली प्रकीर्णन (Rayleigh Scattering) कहा जाता है. इस दौरान कम तरंगदैर्ध्य (Short Wavelength) वाली नीली और बैंगनी रोशनी सबसे अधिक बिखरती है. हमारी आंखें नीले रंग को अधिक स्पष्टता से देख पाती हैं, इसलिए हमें पूरा आसमान नीला दिखाई देता है.
आप सोच सकते हैं कि फिर आसमान बैंगनी क्यों नहीं दिखता? इसकी वजह यह है कि सूर्य की रोशनी में बैंगनी रंग की मात्रा कम होती है. साथ ही, हमारी आंखें नीले रंग के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं और वातावरण बैंगनी रोशनी का कुछ हिस्सा अवशोषित भी कर लेता है. यही कारण है कि हमें आसमान मुख्य रूप से नीला नजर आता है.
अंतरिक्ष से काला क्यों दिखाई देता है आसमान?
अब बात करें अंतरिक्ष की, अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा वायुमंडल नहीं है. वहां न हवा है, न गैसों की परत और न ही ऐसे कण, जो सूर्य की रोशनी को बिखेर सकें. जब प्रकाश बिखरता ही नहीं, तो चारों ओर कोई रंग भी दिखाई नहीं देता. इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों को सूर्य तो बेहद चमकदार दिखाई देता है, लेकिन उसके आसपास का पूरा आकाश गहरे काले रंग का नजर आता है.
इसी वैज्ञानिक कारण की वजह से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से ली गई तस्वीरों में पृथ्वी चमकती हुई दिखाई देती है, जबकि उसके पीछे का आसमान पूरी तरह काला होता है. वहीं, पृथ्वी पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आसमान का रंग लाल, नारंगी और गुलाबी दिखाई देता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस समय सूर्य की किरणों को वातावरण में अधिक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. इस दौरान नीली रोशनी अधिक बिखर जाती है और हमारी आंखों तक लाल तथा नारंगी रंग ज्यादा पहुंचते हैं.
यानी आसमान का रंग बदलना प्रकृति का कोई रहस्य नहीं, बल्कि प्रकाश और वातावरण के बीच होने वाली वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है. अगली बार जब आप साफ नीले आसमान को देखें, तो याद रखिए कि यह रंग वास्तव में हमारी पृथ्वी के वायुमंडल की खूबसूरत देन है.

