असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। राज्य से मिली खबरों के मुताबिक, ऊपरी असम में बाढ़ का पानी कम हो रहा है और अब ध्यान राहत कार्यों पर है, जिसमें बिजली सप्लाई बहाल करना भी शामिल है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि राज्य सरकार के मंत्री पुनर्वास कार्यों में तालमेल बिठाने के लिए पूरे राज्य में जाएंगे। राज्य सरकार की प्राथमिकता शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों के लोगों तक राहत पहुंचाना है। इससे पहले, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि जिन इलाकों में बिजली सप्लाई बंद कर दी गई थी, वहां उसे बहाल करने के लिए एक समन्वित प्रयास किया जा रहा है।

असम में बाढ़ प्रभावित ज़िलों में गोलाघाट, जोरहाट, नागांव और शिवसागर शामिल हैं। चार ज़िलों में कुल 354 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र अभी चल रहे हैं, जहाँ विस्थापित हुए 37,724 लोगों को आश्रय और मदद दी जा रही है। सेना, नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), फ़ायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज़ और असम पुलिस द्वारा बचाव और राहत कार्य किए जा रहे हैं, जबकि बाढ़ के पानी ने कई ज़िलों में तटबंधों, सड़कों, पुलों और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचों को भी नुकसान पहुंचाया है।

असम बाढ़ को लेकर हिमंत बिस्व सरमा का बयान

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि जैसे-जैसे बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, सरकार ने अपना ध्यान बहाली और पुनर्वास पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान एहतियात के तौर पर रोकी गई बिजली आपूर्ति को शिवसागर, जोरहाट, चराइदेव, धुबरी और बोंगाईगांव सहित कई ज़िलों में व्यापक सुरक्षा जांच के बाद चरणों में बहाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम जल्द से जल्द ज़रूरी सेवाओं को बहाल करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हर प्रभावित समुदाय सामान्य स्थिति में लौट आए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाढ़ के बाद पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी और क्षतिग्रस्त स्कूलों व सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की मरम्मत की जाएगी।

राहुल गांधी और खरगे ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना

‘बाढ़-मुक्त असम’ के अधूरे वादे को लेकर कांग्रेस ने BJP पर निशाना साधा। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और असम सरकार से अपील की है कि वे राज्य में बार-बार आने वाले बाढ़ के संकट का स्थायी समाधान खोजने के साथ-साथ तुरंत राहत भी पहुंचाएं। खरगे ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को बचाव, राहत और पुनर्वास के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही, उन्हें PM-CARES फंड से बड़ी मदद जारी करनी चाहिए और बाढ़ में जान गंवाने वाले हर व्यक्ति, घर और आजीविका के नुकसान के लिए उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करना चाहिए। खरगे ने BJP के 2016 के असम विज़न डॉक्यूमेंट का ज़िक्र करते हुए सवाल किया कि सत्ता में एक दशक रहने के बावजूद असम को बाढ़-मुक्त बनाने के वादे क्यों पूरे नहीं हुए।

‘असम में 500 फीसदी ज्यादा बारिश से आई बाढ़’

असम भाजपा विधायक मानव डेका ने कहा कि हाल ही में असम के कई हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ नदियों में पानी बढ़ने के सामान्य कारणों के बजाय भारी बारिश की वजह से आई थी। उनके अनुसार, राज्य के कुछ हिस्सों में सामान्य औसत से 400 से 500 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जिससे ऊंचे इलाकों में भी बड़े पैमाने पर जलभराव हुआ, जिन्हें आमतौर पर बाढ़ से सुरक्षित माना जाता है। भाजपा विधायक ने दावा किया, “प्रभावित इलाकों को पारंपरिक रूप से बाढ़-सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वे ऊंचे स्थानों पर स्थित हैं। हालांकि, इस बार बारिश अभूतपूर्व थी, जो सामान्य स्तर से लगभग 400 से 500 प्रतिशत अधिक थी, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर बाढ़ आई।

बीजेपी विधायकों ने जताई हैरानी

मंत्री बिस्वजीत डाइमरी ने कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास कर रही है और अधिकारी, गैर सरकारी संगठन और सामाजिक संगठन राहत और पुनर्वास कार्यों में लगे हुए हैं। बिस्वजीत डाइमरी ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों का जीवन पटरी पर लाने के लिए लगातार कोशिश जारी है। मुख्यमंत्री हर समय बाढ़ और राहत कार्यों पर निगरानी रखने के साथ प्रभावित लोगों से बात कर रहे हैं। हालोडी में अभी पानी अधिक है, इसलिए वहां पर राहत कार्य करना थोड़ा मुश्किल है। भाजपा विधायक टंकेश्वर राभा ने ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति पर कहा कि यह बहुत ही दुखद है। बाढ़ के कारण मरने वालों के प्रति मेरी संवेदना है। भारत सरकार ने जिस तरह से कदम उठाए हैं, उससे लगता है कि 2-3 दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा और निगरानी कर रहे हैं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि ऐसी प्राकृतिक आपदा में भविष्य में किसी की जान न जाए।

’52 साल में कभी नहीं देखी ऐसी तबाही’

वहीं, ऊपरी असम में बाढ़ की स्थिति पर विपक्ष के नेता वाज़ेद अली चौधरी ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। वहां जो हो रहा है, वैसा हमने पहले कभी नहीं देखा। राहत सामग्री भी सभी तक नहीं पहुंच रही है। जो लोग बाढ़ के पानी में फंसे हुए हैं, उन्हें राहत सहायता नहीं मिल रही है। हमने सीएलपी की तरफ से थोड़ी मदद भी उपलब्ध कराई। एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान ने कहा कि मैंने अपनी जिंदगी के पिछले 52 सालों में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी। यह बहुत खतरनाक है। इसकी वजह से करीब 1,000 लोग बेघर हो गए हैं।

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