CWG 2026 में भारतीय बॉक्सर्स ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए 7 गोल्ड मेडल जीते. 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया. भारत लौटने पर देश की इस बॉक्सर ने न्यूज़ कंसलटेंट से ख़ास बातचीत की.
सवाल : सबसे पहले आपको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 70 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने पर बहुत-बहुत बधाई. इस उपलब्धि को आप कैसे देखती हैं?
अरुंधति चौधरी: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना किसी सपने के सच होने जैसा है. यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बेहद गर्व का पल है. इस पल के लिए मैंने और मेरी पूरी टीम ने काफी मेहनत की थी और उसका फल आज मिला है.
सवाल : आमतौर पर बॉक्सिंग में हरियाणा के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिलता है, लेकिन आप राजस्थान के कोटा से आती हैं. वहां से आपकी शुरुआत कैसे हुई?
अरुंधति चौधरी: मेरा मानना है कि खिलाड़ी किसी भी राज्य से हो सकता है. मेडल सिर्फ हरियाणा से ही नहीं आते, मणिपुर से भी आते हैं और देश के दूसरे राज्यों से भी आते हैं. सबसे जरूरी चीज खिलाड़ी का टैलेंट और मेहनत है. अगर आपके अंदर क्षमता है तो आप राजस्थान, हरियाणा, मणिपुर या किसी भी राज्य से होकर देश के लिए मेडल जीत सकते हैं. राज्य नहीं, खिलाड़ी की मेहनत और लगन मायने रखती है.
सवाल : आपकी बॉक्सिंग का सफ़र कैसे शुरू हुआ?
अरुंधति चौधरी: मैं कोटा की रहने वाली हूं और कोटा को आईआईटी की तैयारी के लिए जाना जाता है. मेरे पापा चाहते थे कि मैं भी आईआईटी की तैयारी करूं, लेकिन मेरा मन पढ़ाई से ज्यादा खेलों में लगता था. मुझे पहले बास्केटबॉल पसंद था. फिर पापा ने कहा कि अगर खेल में करियर बनाना है तो किसी इंडिविजुअल स्पोर्ट्स में जाओ. मैं बचपन में काफी शरारती थी और लड़ाई-झगड़ा भी बहुत करती थी. ऐसे में बॉक्सिंग मेरे स्वभाव के हिसाब से बिल्कुल फिट बैठी और वहीं से मेरी बॉक्सिंग की यात्रा शुरू हुई.
सवाल : आपने किस उम्र में बॉक्सिंग को करियर के रूप में अपनाया?
अरुंधति चौधरी: मैंने 15 साल की उम्र में, जब मैं स्कूल में थी, तब बॉक्सिंग को करियर बनाने का फैसला किया. उसके बाद लगातार मेहनत करती गई और आज उसी मेहनत का नतीजा सबके सामने है.
सवाल : बॉक्सिंग में आपका आदर्श कौन है?
अरुंधति चौधरी: सच कहूं तो बॉक्सिंग में मेरा कोई खास आदर्श नहीं है. मेरे सबसे बड़े आदर्श मेरे माता-पिता हैं. उन्होंने मेरे लिए बहुत मेहनत की, हर कदम पर मेरा साथ दिया और हमेशा मुझ पर भरोसा किया. आज जो मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है, उसमें सबसे बड़ा योगदान उन्हीं का है. अब मेरी कोशिश ओलंपिक में भी देश के लिए मेडल जीतने की रहेगी.
सवाल : फाइनल मुकाबला काफी चुनौतीपूर्ण रहा. उस मुकाबले के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
अरुंधति चौधरी: बिल्कुल, फाइनल बहुत कठिन था. इंग्लैंड की बॉक्सर तकनीकी रूप से काफी मजबूत थी. ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने में अलग ही मजा आता है क्योंकि आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना पड़ता है. मुकाबले के दौरान स्कोर काफी करीबी था, लेकिन आखिर में मुझे जीत मिली. मैच खत्म होने के बाद उन्होंने भी मेरी तारीफ की. वह वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेडलिस्ट भी रह चुकी हैं, इसलिए उनके खिलाफ जीत मेरे लिए और भी खास है.
सवाल : यह आपका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स फाइनल था. क्या आप नर्वस थीं?
अरुंधति चौधरी: नहीं, मैं बिल्कुल नर्वस नहीं थी. मैं काफी कॉन्फिडेंट थी क्योंकि मुझे अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था. मुझे पता था कि अब मेहनत को रिजल्ट में बदलने का समय आ गया है और मैंने उसी सोच के साथ रिंग में कदम रखा.
सवाल : आगे आपका सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है?
अरुंधति चौधरी: मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना है. मुझे लगता है कि भारतीय बॉक्सिंग में बहुत ज्यादा क्षमता है और आने वाले समय में भारत कई बड़े मेडल जीत सकता है. मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं ओलंपिक में तिरंगा सबसे ऊंचा लहराऊं और देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर आऊं.

