JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल तय कर लिया है. आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार से बातचीत के लिए पूरी तैयारी के साथ जाएंगे, लेकिन वार्ता पारदर्शी और सार्वजनिक होनी चाहिए. इसके लिए प्रतिनिधिमंडल की सूची भी जारी कर दी गई है, जिसमें छात्र प्रतिनिधियों के अलावा पत्रकार और कानूनविद को केवल अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में शामिल किया गया है.
आठ छात्र होंगे प्रतिनिधिमंडल का मुख्य चेहरा
छात्रों की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र शामिल किए गए हैं. इनमें रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह शामिल हैं. आंदोलनकारी छात्रों ने कहा है कि सरकार के समक्ष आंदोलन से जुड़ी सभी मांगें, तथ्य और सुझाव केवल यही छात्र प्रतिनिधि प्रस्तुत करेंगे. छात्रों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और इसकी आवाज भी छात्र ही बनेंगे. इसलिए सरकार के साथ होने वाली बातचीत में किसी अन्य व्यक्ति की ओर से मांगें या पक्ष नहीं रखा जाएगा.
पत्रकार और कानूनविद होंगे केवल अभिभावक
प्रतिनिधिमंडल में दो वरिष्ठ पत्रकार और द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा को अभिभावक एवं मार्गदर्शक के रूप में शामिल किया गया है. वहीं कानूनविद अजीत कुमार भी प्रतिनिधिमंडल के साथ अभिभावक की भूमिका में मौजूद रहेंगे. छात्रों ने स्पष्ट किया है कि पत्रकार और कानूनविद वार्ता में किसी प्रकार की बातचीत नहीं करेंगे. वे केवल छात्रों के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए उपस्थित रहेंगे. सभी विषयों पर अपनी बात रखने का अधिकार केवल छात्र प्रतिनिधियों के पास रहेगा.
मीडिया उपकरण लेकर प्रवेश नहीं करेंगे पत्रकार
आंदोलनकारी छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. निर्देशों के अनुसार, पत्रकार प्रतिनिधि बैठक स्थल के अंदर किसी भी प्रकार का माइक, कैमरा, रिकॉर्डिंग डिवाइस या साउंड सिस्टम लेकर प्रवेश नहीं करेंगे. छात्रों का कहना है कि पत्रकारों की मौजूदगी केवल अभिभावक के रूप में रहेगी. उनका उद्देश्य वार्ता को प्रभावित करना नहीं, बल्कि छात्रों को नैतिक और बौद्धिक सहयोग देना है.
सरकार ने पांच सदस्यीय टीम को दिया वार्ता का प्रस्ताव
बुधवार को सरकार की ओर से सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार रजत आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे. उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों को सरकार का संदेश देते हुए कहा कि राज्य सरकार छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है. सरकार चाहती है कि छात्रों की मांगों और समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जाए. सरकार के इस प्रस्ताव का छात्रों ने स्वागत किया और बातचीत के लिए अपनी सहमति भी जताई. हालांकि उन्होंने वार्ता को लेकर अपनी कुछ शर्तें भी सामने रखीं.
बंद कमरे में नहीं होगी बातचीत
छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे बंद कमरे में सरकार से बातचीत नहीं करेंगे. उनका कहना है कि आंदोलन लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, इसलिए वार्ता पूरी तरह सार्वजनिक और पारदर्शी होनी चाहिए. आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार के साथ होने वाली बैठक मीडिया की मौजूदगी में आयोजित की जाए, ताकि राज्य की जनता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी पूरी प्रक्रिया को देख सकें. उनका मानना है कि खुली वार्ता से किसी भी तरह की गलतफहमी या विवाद की संभावना नहीं रहेगी.
शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से होगी वार्ता
छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरी वार्ता छात्र प्रतिनिधियों के नेतृत्व में शांतिपूर्ण, अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से संचालित की जाएगी. उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष रखना है. अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है. यदि वार्ता के प्रारूप और प्रतिनिधिमंडल को लेकर दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है. फिलहाल आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं और पारदर्शी वार्ता की मांग को लेकर एकजुट दिखाई दे रहे हैं.

