जोधपुर: राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिल पाई है। गुरुवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने उनकी अंतरिम मेडिकल जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि, खराब स्वास्थ्य और चिकित्सीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जेल में 24 घंटे की देखभाल के लिए अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित केयरटेकर (देखभालकर्ता) रखने की अनुमति दे दी है।
कोर्ट ने कहा- जमानत के लिए दरवाजा का विकल्प बरकरार
अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में आसाराम की तबीयत अत्यधिक बिगड़ती है, तो वे बदलती स्वास्थ्य परिस्थितियों के आधार पर दोबारा अंतरिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
तथ्य छिपाने पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल की जानकारी सुप्रीम कोर्ट से छिपाई थी, तो पीठ ने सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं को अपने मामले से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का पूर्ण खुलासा करना चाहिए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगने के साथ ही एम्स से आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट भी तलब की थी।
अदालत के फैसले में राहत से जुड़े मुख्य बिंदु
जमानत याचिका खारिज: कोर्ट ने कहा कि खराब स्वास्थ्य और अधिक उम्र (80 वर्ष से अधिक) का हवाला जमानत के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
भविष्य का विकल्प खुला: यदि भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती है, तो वे नई परिस्थितियों के आधार पर दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जेल प्रशासन को निर्देश: राजस्थान की जेल में बंद आसाराम को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और लगातार निगरानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।

