Jantar-Mantar News: जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में याचिकाएं दायर की गई हैं. ऐसी ही एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान दिल्‍ली हाईकोर्ट ने सरकार से सीधा सवाल किया है. कोर्ट ने कहा कि यदि जंतर-मंतर पर बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों की वजह से राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में आम जनजीवन प्रभावित होता है तो आप इसे बंद ही क्‍यों नहीं कर देते हैं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राजधानी के प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर लगातार हो रहे आंदोलनों को लेकर केंद्र सरकार से अहम सवाल पूछे. अदालत ने कहा कि यदि बार-बार होने वाले प्रदर्शनों से दिल्ली की रोजमर्रा की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है, तो सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखा जाना चाहिए. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमित महाजन ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शन नागरिकों के अधिकार हैं, लेकिन इसके कारण पूरी राजधानी को असुविधा का सामना नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘इसे (जंतर-मंतर) बंद क्यों नहीं कर देते? मेरी राय में शहर के भीतर इस तरह की स्थिति नहीं होनी चाहिए, हालांकि, यह निर्णय सरकार को लेना है. आखिर पूरे शहर को अनावश्यक रूप से बंधक क्यों बनाया जाए?’

हाईकोर्ट ने क्‍यों की यह टिप्‍पणी

अदालत की यह टिप्पणी हाल ही में कथित नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए व्यापक छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में आई है. यह प्रोटेस्‍ट कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में आयोजित किया गया था. 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की, जिसके दौरान उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हो गई. स्थिति बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इसके बाद आंदोलन का प्रभाव दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों तक भी फैल गया. सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने एहतियातन मध्य दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था, जबकि कई अन्य स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को नियंत्रित किया गया. इससे बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और राजधानी की सामान्य आवाजाही भी प्रभावित हुई थी.

ऐसे खत्‍म हुआ था प्रोटेस्‍ट

बाद में केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ. सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, आंदोलन के दौरान जान देने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद प्रदर्शन वापस ले लिया गया. अब हाईकोर्ट की ताजा टिप्पणियों के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने को लेकर नई बहस शुरू होने की संभावना है.

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