चेन्नै : डीएमके ने केंद्र की एनडीए सरकार के उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया है। डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि उनकी पार्टी परिसीमन बिल का विरोध करेगी। तमिलनाडु में कांग्रेस के गठबंधन बदलने के बाद यह चर्चा थी कि अब डीएमके नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है। उदयनिधि स्टालिन ने स्पष्ट किया है कि डीएमके ने शुरू से ही परिसीमन का विरोध किया है और आगे भी करती रहेगी।
उदयनिधि ने समर्थन से किया इंकार
उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन बिल का समर्थन देने से साफ इनकार किया है। डीएमके पहले भी संसद में 131वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध कर चुकी है। तब डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने विरोध के तौर पर परिसीमन बिल की कॉपी जलाई थी। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। लोकसभा में इस बिल को पास करने के लिए कम से कम 362 वोटों की जरूरत होगी, जबकि राज्यसभा में 164 सांसदों का समर्थन जरूरी है। लोकसभा में एनडीए के पास लगभग 318 सांसद हैं। डीएमके के समर्थन के बाद यह आंकड़ा 340 हो सकता है। राज्यसभा में एनडीए के 152 सांसद हैं।
डीएमके पर टिकी थी बड़ी संभावना
इंडिया गठबंधन से डीएमके के बाहर होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि संसद में एनडीए को परिसीमन बिल पर द्रविड़ पार्टी का साथ मिल सकता है। एक समाचार पत्र में दावा किया गया था कि परिसीमन बिल के समर्थन के लिए डीएमके ने 3 शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि अगले 25 सालों तक लोकसभा के परिसीमन (का आधार 2011 की जनगणना के बजाय 1971 की जनगणना होनी चाहिए। पार्टी ने सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की भी मांग की है। तीसरी शर्त यह है कि बिल में राज्य-वार एक सूची शामिल हो जिसमें यह दिखाया जाए कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के बाद हर राज्य में कितनी सीटें होंगी।
राहुल गांधी के बयान पर मचा था बवाल
इससे विपक्षी खेमे में खलबली मची थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने परिसीमन बिल को समर्थन देने वालों को 21वीं सदी का एट्टाप्पन कहा था। तमिल में एटाप्पन का मतलब गद्दार है। सीएम सी. जोसेफ विजय ने भी परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए सांसदों की मीटिंग बुलाई है। टीवीके के लोकसभा और राज्यसभा में एक भी सांसद नहीं है, मगर तमिलनाडु सरकार सभी दलों से उनकी राय जानना चाहती है। फिलहाल, तमिलनाडु में 39 लोकसभा सीटें हैं। संसद में इसकी हिस्सेदारी 7.2 प्रतिशत है। अगर परिसीमन बिल पास होता है तो 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ तमिलनाडु में 59 लोकसभा सीटें हो जाएंगी।


