केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू राहुल गांधी से मिलकर कहते हैं कि मान जाओ और संसद चलने दो… महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा करो, लेकिन राहुल हैं कि मानते ही नहीं। वे अड़े हैं कि जब तक केंद्रीय गृहमंत्री ‘विद्यार्थियों पर पैलेट गन चलाने’ की घटना पर वक्तव्य नहीं दे देते, तब तक संसद नहीं चलने देंगे। फर्क इतना ही है कि पहले वे गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े थे, अब बयान पर अड़े हैं। एक तरफ सत्तापक्ष की ‘जिद’, तो दूसरी ओर विपक्ष की ‘जिद’ संसद के कामकाज को ‘स्थगित’ कराती रहती है।

हर रोज सदन में हंगामे के बाद विपक्ष के ज्यादातर दल संसद परिसर में गृहमंत्री के बयान की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं। जो बहस संसद में नहीं हो पाती, वो शाम को चैनलों पर होती है, लेकिन वहां भी कई बार बहस ‘तू-तू, मैं-मैं’ में बदल जाती है। फिर एंकर की ओर से बीच-बचाव किया जाता है। कई बार प्रवक्ता नाराज होकर बहस बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं।

हाल में सबसे मजेदार कहानी निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बनाई। वे सभी चैनलों के हीरो रहे, सिद्ध हुआ कि खुद को खबरों में बनाए रखना वे बखूबी जानते हैं। वे एक दिन भगवा वस्त्र पहनकर साधु के भेष में संसद पहुंचे और बाहर ‘मकर द्वार’ के पास बैठ गए। वे वहां ‘यज्ञ’ करने का ‘नाटक’ करने लगे और नाटकीय रूप में कुछ मंत्र उच्चारित करते दिखे।

उनके चारों ओर घेरा बनाकर खड़े विपक्ष के सांसद बारी-बारी से आकर उनके डिब्बे में चढ़ावा चढ़ाते दिखे। यही नहीं, आजू-बाजू खड़े सांसद ‘चंदा चोर-चंदा चोर’ के नारे लगाते नजर आए। फिर पप्पू यादव ने जब चंदे के डिब्बे को चुराकर भागने का नाटक किया, तो वहां मौजूद सांसद उन्हें पकड़ने की कोशिश करते दिखे।

यह ‘चढ़ावा चोरी कांड’ की एक ‘पैरोडी’ थी, जिसकी पटकथा खराब बताई गई, लेकिन पप्पू यादव और अन्य विपक्षी सांसद इस ‘नुक्कड़ नाटक’ का आनंद लेते नजर आए। ‘चढ़ावा चोरी’ का यह नाटक कुछ सांसदों के लिए भले मजेदार रहा हो, मगर सत्तापक्ष और उसके समर्थकों ने इस पर सवालों की बौछार कर दी। चैनलों पर इस नाटक का प्रसारण देख देश का ‘साधु-संत समाज’ पप्पू यादव के पीछे पड़ गया और उनका जमकर विरोध किया।

भाजपा प्रवक्ताओं ने भी इसे ‘साधु-संतों का अपमान’ बताया। एक चर्चक ने तो इस तरह के नुक्कड़ नाटक को संसद के बाहर करने पर सवाल उठाते हुए इसे ‘साधु-संतों’ के खिलाफ लोगों को ‘उकसाने’ वाला करार दिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत के दौरान पप्पू यादव पर हमले की कोशिश भी हुई, हालांकि पुलिस ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाल लिया।

चुनाव में ‘किसका फायदा होगा और किसका नुकसान’

मगर चैनल चर्चा में यह मुद्दा जल्द ही उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में ‘किसका फायदा होगा और किसका नुकसान’ वाले मुद्दे में बदल गया…। ऐसे मौके पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का मुस्कुराता हुआ चेहरा बहुत कुछ कहता नजर आया। इस सप्ताह उन्होंने ‘पीडीए’ की एकदम ‘नई व्याख्या’ करके सबको चकित कर दिया। उन्होंने बताया कि ‘पीडीए’ का मतलब ‘पंडित है’…। एक चर्चक ने साफ किया कि इस ‘स्किट’ ने स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश में जीतने के लिए सपा वाले इस बार ‘सवर्ण जातियों’, खासकर ‘ब्राह्मणों’ को अपना नया ‘वोट बैंक’ बनाने के चक्कर में हैं।

इस बीच, झारखंड के रांची में राज्य की ‘परीक्षा व्यवस्था’ में पैदा हुई गड़बड़ियों में सुधार करने की मांग को लेकर कई दिन से भूख हड़ताल कर रहे कुछ विद्यार्थी बार-बार खबर बनते रहे। चर्चा में कई चर्चक ‘जंतर-मंतर ब्रांड’ जेन-जी के प्रदर्शन और उनके ‘खानपान’ की तुलना ‘रांची में प्रदर्शन’ कर रहे युवाओं के ‘सादे खानपान’ से करते नजर आए। एक चैनल तो ‘जंतर-मंतर’ के जेन-जी की ‘पांच सितारा जीवनशैली’ के पीछे ही पड़ गया और रांची में भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों के प्रति अपनी पूरी हमदर्दी एवं संवेदना जताता रहा। साथ ही जंतर-मंतर वाली जेन-जी की ओर से रांची में भूख हड़ताल करने वालों को लेकर अपनाई गई चुप्पी पर सवाल उठाता रहा।

फिर एक एंकर ने रहस्य खोला कि ‘काकरोच जनता पार्टी’ की ओर से बनाई गई ‘आठ सदस्यों की टीम’ में एक भी ‘जेन-जी विद्यार्थी’ को शामिल नहीं किया गया है। इसे देख कुछ जेन-जी ‘काकरोच पार्टी’ से मांग करने लगे कि हमने भी लाठी खाई है, सबकी राय लेकर सबको पार्टी से जोड़ें।

फिर आया तेरह साल पहले ‘बलात्कार’ के आरोपित तरुण तेजपाल को ‘दस साल के कारावास’ की सजा देने वाला मुंबई हाई कोर्ट का फैसला। इस पर यों तो सभी चैनलों में चर्चा रही, लेकिन जिस तरह से एक एंकर ने तेजपाल तथा उसके समर्थन में आईं मशहूर हस्तियों और नामचीन नेताओं के पुराने बयानों की खबर ली, वह देखते ही बनती थी। एक वकील को तो एंकर ने इस तरह लाजवाब किया कि वह नाराज होकर बहस से बाहर हो गईं।सुधीश पचौरी

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