Breast Pumping vs Breastfeeding: नवजात शिशु के जन्म के बाद हर मां के मन में सबसे बड़ा सवाल उसके पोषण को लेकर होता है. डॉक्टरों का मानना है कि बच्चे के शुरुआती 6 महीनों के लिए मां का दूध अमृत समान है. हालांकि, बदलते समय और बदलती लाइफस्टाइल के साथ अब दूध पिलाने के तरीकों में भी बदलाव आया है.
आजकल कामकाजी और व्यस्त माताएं सीधे स्तनपान कराने के बजाय ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध निकालकर बोतल या चम्मच से बच्चे को पिला रही हैं, लेकिन क्या इन दोनों तरीकों में कोई अंतर है? आइए जानते हैं कि आपके बच्चे के लिए इन दोनों में से कौन सा तरीका सबसे बेस्ट है.
ब्रेस्ट पंपिंग को लेकर चिंता क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज स्तनपान को केवल मां का दूध पिलाना मान लिया गया है और ब्रेस्ट पंपिंग को स्तनपान के बराबर समझा जा रहा है. हालांकि, ऐसा करने से मां और बच्चे के बीच का अनोखा और प्राकृतिक रिश्ता कमजोर पड़ सकता है. पंपिंग एक जरूरी जरिया तो है, पर यह सीधे स्तनपान की जगह कभी नहीं ले सकता. विशेषज्ञों का कहना है कि माताओं को मशीनों या तकनीक के बजाय सही मदद और सहयोग की ज्यादा जरूरत है. अगर ऑफिसों में रूल्स हों, मैटरनिटी लीव मिले और स्तनपान के लिए सही गाइडेंस मिले तो महिलाओं को बार-बार पंप से दूध निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.
ब्रेस्ट फीडिंग के कई फायदे
डॉक्टरों के अनुसार, स्तनपान सिर्फ बच्चे का पेट भरने के लिए नहीं है. यह बच्चे को बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है और उसके पेट को स्वस्थ रखता है. शुरुआती दो सालों में यह बच्चे के पूरे पाचन तंत्र को मजबूत करने का काम करता है. साथ ही कई रिसर्च में पता चला है कि सीधा स्तनपान कराने से बच्चे का दिमाग तेज होता है, उसका मेटाबॉलिज्म सुधरता है और बचपन में मोटापे का खतरा भी काफी कम हो जाता है.
ब्रेस्ट पंप इस्तेमाल करने का सही तरीका
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर ब्रेस्ट पंप का इस्तेमाल करना जरूरी हो तो ऐसे मे साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए. महिलाओं को पंप के उपकरणों को ठीक से साफ करना, उन्हें सैनेटाइज करना और निकाले गए दूध को सुरक्षित रखना जरूर सीखना चाहिए. साथ ही डॉक्टर दूध पिलाने के तरीके को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है. जहां तक हो सके, बच्चे को बोतल के बजाय चम्मच या कप से दूध पिलाना बेहतर होता है. बोतल से दूध पीने पर कुछ बच्चे निप्पल कन्फ्यूजन का शिकार हो सकते हैं, जिससे बाद में उनके लिए मां का दूध सीधे पीना मुश्किल हो जाता है.

