तिरुवनंतपुरम/नई दिल्ली: संसद के मॉनसूत्र सत्र में बुधवार को ‘लुंगीवाला’ शब्द को लेकर राज्यसभा में सियासी टकराव हुआ। सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने सदन में विशेषाधिकार नोटिस रखते हुए कह कि बीजेपी की सांसद सुष्मिता देव ने बार-बार उन्हें लुंगीवाला कहा। ब्रिटास ने बताया कि सोमवार को टैक्स से जुड़े कामकाज पर चर्चा के दौरान देव ने उनके भाषण में बार-बार बाधा डाली और उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहकर संबोधित किया। इस मुद्दे पर हंगामा और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। ब्रिटास ने इस मामले में दक्षिण भारत के लोगों से अपमान से जोड़ा है।
दक्षिण में लाखों लोग पहनते हैं लुंगी
ब्रिटास ने कहा कि लुंगी लाखों लोगों का पहनावा है। खासकर दक्षिण भारत के लोग इसे पहनते हैं। उनके इस शब्द का अपमानजनक इस्तेमाल दक्षिण भारतीयों का मजाक उड़ाने वाली पुरानी रूढ़ियों से जुड़ा रहा है। उन्होंने 1960 और 1970 के दशक में मुंबई में दक्षिण भारतीयों के खिलाफ चलाए गए अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में ‘लुंगीवाला’ और ‘मद्रासी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपमानजनक तरीके से किया जाता था। ब्रिटास ने अपने नोटिस में दावा किया कि घटना के दौरान मौजूद कुछ सांसदों ने भी टिप्पणी पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने बताया कि पास बैठे सुखेंदु शेखर रॉय ने बाद में सुष्मिता देव को माफी मांगने की सलाह देने की बात कही थी। ब्रिटास ने यह मामला केवल एक सांसद की गरिमा का नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले सदस्यों के सम्मान से भी जुड़ा है।
कौन हैं जॉन ब्रिटास
डॉ. जॉन ब्रिटास एक अनुभवी पत्रकार और केरल में लेफ्ट के नेता हैं। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के राज्यसभा सदस्य और पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता हैं। वह वह कैराली टेलीविजन नेटवर्क (मलयालम कम्युनिकेशंस लिमिटेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एडिटर के तौर पर भी काम करते हैं। वह अप्रैल 2021 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। मई 2025 में उन्हें ऊपरी सदन में CPI(M) की पार्लियामेंट्री पार्टी के नेता के पद पर प्रमोट किया गया। वह राज्यसभा आने से पहले 2016 से 2021 तक केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के मीडिया सलाहकार रहे हैं। वह बतौर पत्रकार बाबरी मस्जिद गिराए जाने और गुजरात दंगों रिपोर्टिंग कर चुके हैं।

