नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहायक अभियंता के तीन सप्ताह के भीतर किए गए दूसरे तबादले को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारी का पहले ही दूसरे डिवीजन में तबादला किया जा चुका था, ऐसे में महज इस आधार पर कि लोहाघाट उनकी पसंद की जगह थी, उन्हें दोबारा स्थानांतरित नहीं किया जा सकता था। 

अदालत ने संबंधित तबादला आदेश को सत्ता का दुर्भावनापूर्ण छद्म प्रयोग बताते हुए रद्द कर दिया। मामला पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अरुण कुमार वर्मा से संबंधित है। उन्हें वार्षिक स्थानांतरण प्रक्रिया के दौरान 30 जून 2026 को भवाली से लोहाघाट स्थानांतरित किया गया था। लोहाघाट में कार्यभार ग्रहण करने के करीब तीन सप्ताह बाद 24 जुलाई 2026 को उन्हें प्रशासनिक आधार पर दोबारा थराली स्थानांतरित कर दिया गया। राज्य की ओर से अदालत को बताया गया कि पीडब्ल्यूडी भवाली के अस्थायी डिवीजन के अधिशासी अभियंता ने 20 जनवरी 2026 को अरुण कुमार वर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने, जनवरी 2026 से वेतन रोकने तथा प्रशासनिक आधार पर उन्हें दूसरे डिवीजन में स्थानांतरित करने की संस्तुति की थी। 

राज्य का तर्क था कि लोहाघाट में उनका तबादला उनकी पसंद के आधार पर हुआ था जबकि थराली स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया। हालांकि अदालत ने पाया कि लोहाघाट भी दूसरे डिवीजन में आता है और इस तरह अधिशासी अभियंता की 20 जनवरी की संस्तुति का अनुपालन पहले ही हो चुका था। खंडपीठ ने कहा कि केवल इसलिए कि लोहाघाट अधिकारी की पसंद की जगह थी, उन्हें वहां कार्यभार ग्रहण करने के महज तीन सप्ताह बाद फिर से स्थानांतरित करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने 24 जुलाई के तबादला आदेश को निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। खंडपीठ ने यह फैसला विगत 10 अगस्त को सुनाया गया लेकिन आदेश की प्रति आज मिल पाई। 

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