नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कावेरी जल विवाद मामले पर बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़ने के आदेशों का तुरंत पालन करने को कहा है।
दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालल में आरोप लगाया कि कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद उसे अपने हक का पानी (आवंटित हिस्सा ) (26.954 टीएमसी) नहीं मिल रहा है। जिसके बाद कोर्ट ने पानी छोड़ने के आदेशों को तुरंत पालन करने को कहा है।
24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक छोड़े गए पानी की नवीनतम स्थिति अदालत के समक्ष पेश की जाए। तमिलनाडु की पानी छोड़ने के निर्देश देने की याचिका पर अदालत ने 24 अगस्त को सुनवाई तय की है।
तमिलनाडु सरकार ने आरोप लगाया कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) द्वारा अनुशंसित पानी की मात्रा और कर्नाटक द्वारा वास्तव में आपूर्ति किया गया पानी, दोनों ही उसकी आवश्यकता से काफी कम थे।
हाल ही में हुई बारिश से पानी की स्थिति में सुधार
केआरएस और काबिनी जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों में हाल ही में हुई बारिश से राज्य में पानी की स्थिति बेहतर हुई है। राज्य सरकार के अनुसार, बिलिगुंडलू में देय आनुपातिक हिस्सा 26.954 टीएमसी होना चाहिए।
28 जुलाई को हुई एक बैठक में कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 29 जुलाई से शुरू होने वाले 15 दिनों के लिए तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। हालांकि, तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलिगुंडलू में 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच दर्ज किया गया वास्तविक प्रवाह मात्र 158 से 550 क्यूसेक के बीच रहा।
कर्नाटक के 4 प्रमुख जलाशयों में भरपूर पानी
तमिलनाडु सरकार के एक बयान के अनुसार, 3 अगस्त तक कर्नाटक के चार प्रमुख जलाशयों- कृष्णा राजा सागर, काबिनी, हरंगी और हेमावती जलाशयों में संयुक्त जल स्तर 77.537 टीएमसी था। तमिलनाडु का तर्क है कि उपलब्ध जल भंडारण यह स्पष्ट करता है कि कर्नाटक बिना किसी कठिनाई के तमिलनाडु के हिस्से का पानी जारी कर सकता है।


