कोलकाता : 4 मई 2026, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम ने पूर्वी भारत की राजनीतिक तस्वीर बदल गई। अंग-बंग और कलिंग में बीजेपी का शासन हो गया। जिस पश्चिम बंगाल में 34 साल लगातार वाम दलों और 15 साल तृणमूल कांग्रेस की सत्ता रही, वहां बीजेपी का भगवा परचम लहराने लगा। 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ली। सीएम की कुर्सी संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने ताबड़तोड़ फैसले लिए। राज्य के राजनीति में उठापटक भी हुई। चुनाव नतीजों आने के बाद एक महीने के अंदर टीएमसी विधायक दल और संसदीय दल के टुकड़े हो गए। 100 दिनों में राजनीति ऐसी बदली कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी का कुनबा बैकफुट पर है। टीएमसी न सिर्फ संसद और विधानसभा में बल्कि पंचायतों में भी कमजोर हो गई। कांग्रेस और वाम दल नजर नहीं आ रहे हैं।

ब्यूरोक्रेसी पर बनाई पकड़, बड़े फैसले लिए

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के सामने सरकार बनाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती ब्यूरोक्रेसी को काबू करने की थी। 15 साल में टीएमसी शासन के दौरान वेस्ट बंगाल पुलिस सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर काम करने के आरोप लगे थे। सीएम शुभेंदु ने अफसरों की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए। अफसरों का पॉलिटिकल मंचों पर आना-जाना बंद कराया। पुलिस को प्रफेशनल तरीके से काम करने की नसीहत दी। टीएमसी राज में जमे विवादित अफसरों के तबादले किए। तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों और आरजी कर रेप केस जैसे मामलों की जांच शुरू कराई। सीबीआई समेत केंद्रीय जांच एजेंसियों को दोबारा पश्चिम बंगाल में एंट्री के आदेश दिए। बांग्लादेश बॉर्डर से जुड़े जिलों में बीएसएफ को खुली छूट दी। वंदे मातरम, बांग्लादेश बॉर्डर, दीघा जगन्नाथ धाम जैसे मुद्दों पर बीजेपी के स्टैंड को लागू किया।

पुराने केस खोले, चुनावी वादे भी किए पूरे

बीजेपी सरकार ने जनता के बीच किए गए चुनावी वादों को पूरा करना शुरू किया। रियायती दर पर मछली चावल खिलाने के लिए कैंटीन खोली गई। 1 जून से महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की सहायता देने वाली अन्नपूर्णा योजना को मंजूरी दी गई। मौलवियों की सरकारी सैलरी बंद की गई। धार्मिक आधार पर दी जाने वाली सरकारी सहायता को भी खत्म कर दिया गया। कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य की मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द कर दिया गया है। सरकारी बसों में महिलाओं के लिए फ्री यात्रा का वादा पूरा किया। आरजी कर केस में नए सिरे से जांच शुरू हुई। पुराने मामलों में जहांगीर खान, वीर बहादुर सिंह, अणुब्रत मंडल के बॉडीगार्ड, शेख शाहजहां समेत कई टीएमसी नेता गिरफ्तार किए गए। अवैध वसूली के लिए लगाए गए टोल को भी बंद कराया गया।

फाल्टा उपचुनाव में कराया बदलाव का अहसास

शुभेंदु अधिकारी ने सरकार बनाने के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल के बदले माहौल का अहसास फाल्टा उपचुनाव में कराया। अभिषेक बनर्जी के करीबी टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ पुष्पा ने वोटिंग से पहले अपने पैर पीछे खींच लिए। फाल्टा से बीजेपी जीती। बाद में जहांगीर खान को चुनाव बाद हिंसा, रंगदारी और जमीन कब्जाने के मामलों में एसटीएफ ने भारत-नेपाल बॉर्डर के पास से गिरफ्तार किया। टीएमसी नेताओं पर अंडे फेंकने की तस्वीरें भी सामने आईं। कई वॉन्टेड अपराधियों के निकर परेड पर सवाल भी उठे। कट मनी लेने के कई आरोपियों ने लोगों को पैसे वापस किए। जुलाई में दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 साल की लड़की की रेप के बाद हत्या हुई। 8 जुलाई को आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस के अनुसार, क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान आरोपी ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की थी।

टीएमसी में भगदड़ मची, विपक्ष की ताकत खत्म

बंगाल की राजनीति में ट्विस्ट तब आया, जब टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिला। टीएमसी के 60 विधायक ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बागी गुट में शामिल हो गए। फिर नगर निगमों में इस्तीफों का दौर चला। कोलकाता समेत कई निगमों में प्रशासक की नियुक्ति करनी पड़ी। पंचायत स्तर पर भी टीएमसी नेता पार्टी छोड़ने लगे। राज्यसभा से तीन टीएमसी सांसदों ने इस्तीफा दिया और बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतकर दोबारा संसद पहुंचे। लोकसभा में भी टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 ने नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाली काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय, सयोनी घोष जैसे सांसद विपक्ष के खेमे से निकलकर सत्ता पक्ष में पहुंच गए।

बंगाल के ट्रेंड से अलग गए शुभेंदु अधिकारी

राजनीतिक एक्सपर्ट मानते हैं कि इस बदली राजनीति में सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की राजनीति के अनुभवों का इस्तेमाल किया। अभी पश्चिम बंगाल में बीजेपी शासन का दौर शुरू हुआ है। पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास में एक पार्टी का लंबे समय तक सत्ता में रहने का ट्रेंड रहा है। जब सत्ता बदलती है कि जिला स्तर से राजधानी कोलकाता तक पॉलिटिकल सिस्टम बदलता है। 2011 में सत्ता हासिल करने के बाद वाम दलों के ग्राउंड नेटवर्क पर कब्जा किया था। शुभेंदु अधिकारी इस ट्रेड से उलट चल रहे हैं। उन्होंने उस नेटवर्क पर ही धावा बोला है, जो सत्ता के साथ धीरे से चिपक जाते हैं। फिलहाल शुभेंदु अधिकारी ने 100 दिनों में विपक्ष की हालत कमजोर कर दी है। नगर निकाय और पंचायत चुनाव में यह पता चलेगा कि उनका दांव कितना सटीक साबित हुआ।

Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
Exit mobile version