भारतीय शेयर बाजार ने आखिरकार पलटी मार ली है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में अच्छी-खासी तेजी देखी जा रही है। सुबह 10 बजकर 15 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 0.77 फीसदी या 594 अंक की तेजी के साथ 77,502 पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, निफ्टी-50 0.61 फीसदी या 146 अंक की तेजी के साथ 24,223 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार में सिर्फ बड़े शेयरों में ही तेजी नहीं आई, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में आधे फीसदी से ज्यादा की बढ़त दिखाई दी। इस तेजी ने निवेशकों को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन बाजार के जानकार अभी इसे पूरी तरह ट्रेंड बदलने का संकेत मानने से बच रहे हैं।
आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स पैक के 30 में से 28 शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इंफोसिस, इंडिगो, टीसीएस, बजाज फाइनेंस और टेक महिंद्रा में करीब 1 से 2 फीसदी की तेजी रही। इसके अलावा पावर ग्रिड, बीईएल, इटरनल, एसबीआई, भारती एयरटेल, आईटीसी, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक जैसे शेयर भी करीब 1 फीसदी तक चढ़े। सेक्टर की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज एक्स बैंक 1 फीसदी से ज्यादा चढ़े और बाजार में तेजी की अगुवाई की। दूसरी तरफ निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स लाल निशान पर ट्रेड करता दिखा।
बाजार में तेजी की 5 बड़ी वजहें
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सपोर्ट
अमेरिका में लॉन्ग टर्म गवर्नमेंट बॉन्ड की बायबैक योजना का आकार दोगुना करने की खबर से बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। इससे निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई और शेयर बाजार को सपोर्ट मिला है। अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड घटकर 4.637 फीसदी पर आ गई है। 30 साल की यील्ड 5.181 फीसदी पर और 2 साल की यील्ड 4.162 फीसदी रही है। सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह ने बताया कि बॉन्ड यील्ड में गिरावट का असर अक्सर इक्विटी बाजार पर पॉजिटिव दिखता है, क्योंकि इससे शेयरों के मुकाबले बॉन्ड का आकर्षण कुछ कम हो सकता है।
डॉलर कमजोर हुआ तो रुपये को मिला फायदा
अमेरिकी डॉलर में कमजोरी के बाद रुपया शुरुआती कारोबार में 17 पैसे मजबूत होकर 95.56 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर तीन महीने के निचले स्तर पर आने से रुपये को सहारा मिला है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। ऐसे में रुपये में बड़ी मजबूती की गुंजाइश सीमित रह सकती है। एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में रुपया 95.40 से 95.90 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है।
लगातार गिरावट के बाद शॉर्ट कवरिंग
पिछले सात सेशंस में निफ्टी 2 फीसदी से ज्यादा टूट चुका था। यह करीब 11 महीने में उसकी सबसे लंबी चली गिरावट थी। सेंसेक्स भी लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद संभला है। ऐसे में जिन ट्रेडर्स ने बाजार में गिरावट की उम्मीद में शॉर्ट पोजीशन बनाई थी, उन्होंने तेजी आते ही अपनी पोजीशन काटनी शुरू कर दी। इसे शॉर्ट कवरिंग कहा जाता है। बाजार में आज की तेजी के पीछे इसे भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि बाजार पिछले करीब 12 कारोबारी सत्रों से दबाव में था और अब शॉर्ट टर्म में रुख बदलने की कोशिश कर सकता है। उनके मुताबिक बाजार ओवरसोल्ड जोन में है और शॉर्ट कवरिंग से हल्की तेजी आगे भी देखने को मिल सकती है।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी
विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई भी बाजार से पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं। एनएसई के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को भारतीय शेयरों में 408 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। इससे एक दिन पहले भी उन्होंने 2,573 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। बाजार में कमजोरी के बीच विदेशी निवेशकों की खरीदारी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
दुनिया के दूसरे बाजारों से भी अच्छे संकेत
भारतीय बाजार को ग्लोबल मार्केट से भी सपोर्ट मिला है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6 फीसदी से ज्यादा उछल गया। जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग भी 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त में रहे। अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र का कारोबार सकारात्मक रहा। टेक शेयरों वाले नैस्डैक में करीब 0.16 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
बाजार में आया है दिलचस्प बदलाव
बाजार की मौजूदा तस्वीर में एक दिलचस्प बदलाव नजर आ रहा है। बड़े यानी लार्जकैप शेयर दबाव में हैं, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अपेक्षाकृत बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं। वीके विजयकुमार के मुताबिक, मिड और स्मॉलकैप में आई तेजी सिर्फ सट्टेबाजी पर आधारित नहीं है। इन कंपनियों की बिक्री और कमाई में हो रही बढ़ोतरी भी इस तेजी को आधार दे रही है। सीडीएमओ, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स में कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर है। इन सेक्टर की कंपनियों के मैनेजमेंट भी भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।


