गुवाहाटी: मिजोरम के पूर्व मुख्यमंत्री जोरमथांगा को गुरुवार को पढ़ाई पूरी करने के छह दशक बाद डिग्री दी गई। गुवाहाटी स्थित यूनिवर्सिटी के फनिधर दत्ता सेमिनार हॉल में आयोजित समारोह में वाइस-चांसलर नानी गोपाल महंता ने जोरमथांगा को सर्टिफिकेट सौंपें। जोरमथांगा ने 1966 में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से जुड़े मणिपुर के धनमंजूरी कॉलेज में अंडरग्रेजुएट की आखिरी परीक्षा दी थी। उन्होंने यह परीक्षा सेकंड-क्लास रिजल्ट के साथ पास की थी। उनका मुख्य विषय इंग्लिश था। एग्जाम देने के तुरंत बाद जोरमथांगा MNF के हथियारबंद आंदोलन से जुड़कर अंडरग्राउंड हो गए। राजनीतिक बदलाव के बाद वह मुख्यधारा में लौटे और तीन बार सीएम बने, मगर उन्हें अपना सर्टिफिकेट लेने का मौका नहीं मिला।

1966 में सशस्त्र आंदोलन में शामिल हुए थे जोरमथांगा

1966 में जोरमथांगा ने कॉलेज की पढ़ाई का आखिरी एग्जाम दिया। इसी साल मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) ने लाल डेंगा के नेतृत्व में सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की। एमएनएफ ने सुरक्षा बलों पर हमला कर मिजो बाहुल्य जिलों को स्वतंत्र करने का ऐलान कर दिया। जोरमथांगा भी लाल डेंगा के साथ इसमें शामिल हो गए। इसके बाद अगले 20 साल तक मिजोरम में संघर्ष और हिंसा का दौर चला। जून 1986 में मिजोरम शांति समझौते के बाद 1987 में मिजोरम में लाल डेंगा की सरकार बनी। अपने पहले ही चुनाव में जोरमथांगा चंफई से विधायक बने। तब सीएम लालडेंगा के मंत्रिमंडल में उन्हें वित्त और शिक्षा जैसे बड़े मंत्रालयों का मंत्री बनाया। 1990 में लालडेंगा की निधन तक ज़ोरमथंगा उनके सबसे करीबी बने रहे। बाद में उन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट के अध्यक्ष बने। फिर वह 1998 से 2008 तक लगातार मिजोरम के मुख्यमंत्री बने। उनका तीसरा कार्यकाल दिसंबर 2018 से 2023 तक रहा।

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